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कोरोना वायरस ने बदला वर्किंग स्टाइल, बेंगलुरू के स्टार्टअप ने तमिलनाडु के गांव को बनाया ठिकाना

इंस्टाक्लीन ने अपनी पूरी टीम को पश्चिमी घाट पर शिफ्ट कर दिया है. इस कदम के पीछे दो मकसद हैं, एक तो स्टाफ को कोरोना वायरस के खतरे से बचाया जा सके. दूसरा, स्टाफ के वर्क आउटपुट में कोई कमी न आने पाए.

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तमिलनाडु के थेवाराम गांव से स्टार्टअप कंपनी का काम (फोटो-शालिनी मारिया लोबो)
तमिलनाडु के थेवाराम गांव से स्टार्टअप कंपनी का काम (फोटो-शालिनी मारिया लोबो)

  • तमिलनाडु के थेवाराम गांव में इंस्टाक्लीन कंपनी
  • स्टाफ को कोरोना के खतरे से बचाने का प्रयास

ज़मीन पर चादर समेत गद्दे बिछे हैं. साथ ही तकिए रखे हैं. अक्सर फॉर्मल ड्रेस में रहने वाले स्टाफ सदस्य ट्रैक्स और टी-शर्ट में गद्दों पर बैठे हैं. सामने लैपटॉप्स पर नज़रें हैं और उनका काम हो रहा है. ये नज़ारा है तमिलनाडु के थेवाराम गांव में इंस्टाक्लीन कंपनी के नए दफ्तर का.

बेंगलुरू स्थित इको-फ्रैंडली एप इंस्टाक्लीन ने अपना ठिकाना अब तमिलनाडु दूरदराज के गांव थेवाराम को बना लिया है. अपने कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की इजाज़त देने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में इंस्टाक्लीन ने अपनी पूरी टीम को पश्चिमी घाट पर शिफ्ट कर दिया है. इस कदम के पीछे दो मकसद. एक तो स्टाफ को कोरोना वायरस के खतरे से बचाया जा सके. दूसरा, स्टाफ के वर्क आउटपुट में कोई कमी न आने पाए.

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इको-फ्रैंडली स्टार्ट अप होने की वजह से इंस्टाक्लीन को पर्यावरण से गहराई से जुड़ने का भी नया रास्ता मिल गया है. इंस्टाक्लीन से जुड़ी एंड्रिया कहती हैं, “ये टीम के हर सदस्य के लिए नया अनुभव है. किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा भी किया जा सकता है. हर किसी के अपने सवाल थे, लेकिन वहां जाने के बाद और इस अनुभव को जीने के बाद, हर सदस्य में व्यक्तिगत तौर पर सार्थक बदलाव देखा जा सकता है.” टीम को काम के बाद खाली वक्त में स्विमिंग, ट्रैकिंग और अन्य खेल गतिविधियों का भी भरपूर मौका मिल रहा है.

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