कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (CMC) अस्पताल बंगाल का प्रीमियर सरकारी संस्थान है. यहां कार्यरत सात डॉक्टरों के कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए जाने के बाद डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. CMC के 200 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर्स ने एक खुली चिट्ठी में प्रबंधन पर Covid-19 संदिग्धों को लेकर खराब मैनेजमेंट का आरोप लगाया है.
एशिया के इस पहले मेडिकल कॉलेज में कार्यरत जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि ये संस्थान स्थिति की खराब हैंडलिंग की वजह से हेल्थ वर्कर्स और मरीजों के लिए खतरनाक जोन बन गया है.
जूनियर डॉक्टर्स ने सभी फ्रंटलाइन मेडिकल टीमों के लिए टेस्टिंग की मांग की है. चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले एक जूनियर डॉक्टर ने पहचान नहीं खोलने की शर्त पर इंडिया टुडे से बात की. 24 वर्षीय इस जूनियर डॉक्टर ने कहा कि Covid-19 संदिग्धों के संपर्क में आने वाले फ्रंटलाइन डॉक्टर्स को N95 मास्क तक नहीं उपलब्ध कराए जा रहे.
इस जूनियर डॉक्टर को एक्सपोजर की वजह से खुद में भी लक्षण महसूस हो रहे हैं.
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इंडिया टुडे की जूनियर डॉक्टर से फोन पर हुई पूरी बात-
सवाल 1- आप पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पताल के फ्रंटलाइन स्टाफ में से एक हैं. क्या आप जैसे जूनियर डॉक्टर्स को जो मेडिकल इक्विप्मेंट्स मुहैया कराए जा रहे हैं, आप उनसे संतुष्ट है? आपका क्या अनुभव है?
जूनियर डॉक्टर- ताजा गाइडलाइंस के मुताबिक सभी हेल्थकेयर वर्कर्स को N95 मास्क उपलब्ध कराना जरूरी है. दिक्कत ये है कि इन मास्क को इक्का-दुक्का जगहों पर ही काम करने वालों को उपलब्ध कराया जा रहा है. ओपीडी और अन्य विभागों में ये नहीं दिए जा रहे. हम लगातार इनकी मांग कर रहे हैं.
सवाल 2- आपको ये N95 मास्क क्यों नहीं दिए जा रहे?
जूनियर डॉक्टर- हमें बताया गया है कि ये मास्क शॉर्ट सप्लाई में हैं. हमें ऐसी स्थिति में साधारण मास्क की तीन-तीन लेयर पहन कर काम करना पड़ रहा है.
PPEs की भी कमी है. अगर आपको PPE बिना N95 मास्क दिया जाता है तो उसका कोई फायदा नहीं है. PPEs जनरल वार्ड में काम करने वालों को दिए जा रहे हैं.
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सवाल 3- PPEs की क्वालिटी को लेकर भी बहुत सवाल उठते हैं, आपका इस बारे में क्या कहना है?
जूनियर डॉक्टर- शुरू में PPEs को लेकर राज्य में दिक्कत थी. हमें रेनकोट उपलब्ध कराए गए थे. अब स्थिति बेहतर है. हमें PPE किट दिए जा रहे हैं, लेकिन N95 मास्क की बहुत किल्लत है.
सवाल 4- क्या संदिग्ध Covid-19 मरीजों की भर्ती या स्क्रीनिंग में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं किया जा रहा?
जूनियर डॉक्टर- कुछ मेडिकल कॉलेज में ये समस्या है. मरीजों के शुरू में आने पर टेस्टिंग नहीं हुए होने से पता नहीं होता कि वो संदिग्ध है या नहीं. ऐसे मरीजों को डॉक्टर बिना PPE ही हैंडल करते हैं. Covid-19 को क्लिनिकल डायग्नोस नहीं किया जा सकता. तीन-तीन शिफ्ट के डॉक्टर ऐसे मरीज के संपर्क में आते हैं. फिर मरीज का टेस्ट होता है और अगर वो Covid-19 पॉजिटिव निकलता है तो उसे देखने वाले सभी डॉक्टर्स, नर्स और अन्य स्टाफ को क्वारनटीन में भेजने की जरूरत होती है, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ.
सवाल 5- तो ऐसे में संदिग्ध मरीजों तक हेल्थवर्कर्स का काफी एक्सपोजर हो रहा है?
जूनियर डॉक्टर- जी हां.
सवाल 6- कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के टेस्ट भी पॉजिटिव आए हैं. आप जिस अस्पताल में ड्यूटी दे रहे हैं, क्या वहां की स्थिति बता सकते हैं?
जूनियर डॉक्टर- ये समस्या शहर के एक अस्पताल में आई. वहां 3 या अधिक शिफ्ट के डॉक्टर एक मरीज के संपर्क में रहे जिसका बाद में कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया. गाइडलाइंस ये हैं कि ऐसे हेल्थवर्कर्स को तत्काल क्वारनटीन में भेजा जाए. 5-6 दिन बाद इन्हें एक होटल में भेजा गया. इस होटल में एक कमरे में 4 या अधिक लोग ठहराए गए और एक ही बाथरूम का इस्तेमाल किया. इससे क्वारनटीन के मायने ही खत्म हो गए.
सवाल 7- संदिग्ध का टेस्ट होने में नौकरशाही अड़चनों की वजह से देर होने की रिपोर्ट्स पर आप क्या कहेंगे?
जूनियर डॉक्टर- निश्चित तौर पर ऐसा होता है. मैं आपको बताऊं कि एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी रूम में जब कोई मरीज आता है तो वो Covid-19 संदिग्ध है या नहीं, ये अलग करने की व्यवस्था नहीं होती. अगर कोई मरीज सांस की दिक्कत की वजह से मरता है तो उसके डेथ सर्टिफिकेट में जरूरी नहीं उसकी मौत का सही कारण दर्ज हुआ हो. हो सकता है वो Covid-19 पॉजिटिव रहा हो लेकिन ये तब तक दर्ज नहीं किया जाएगा जब तक कि उसका टेस्ट न हुआ हो.
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टेस्ट में देरी इसलिए भी होती है क्योंकि एक दिन में हमें बताया जाता है कि कितने टेस्ट होने हैं. डॉक्टर जो संपर्क में आए होते हैं उनके टेस्ट में देर होने से ये खतरा होता है कि क्या होगा अगर वो खुद भी पॉजिटिव निकले. इससे उन्होंने औरों को भी संक्रमित कर दिया तो टेस्टिंग का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है.
सवाल 8- अभी क्या स्थिति है? मेडिकल कम्युनिटी खास तौर पर फ्रंटलाइन पर रहने वाले जूनियर डॉक्टर्स खुद को जोखिम को लेकर क्या सोचते हैं?
जूनियर डॉक्टर- मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी होने के बाद प्रशासन ने हमें बैठक के लिए बुलाया और क्वारनटीन सुविधा उन सभी को दिए जाने के बारे में कहा जो एक्सपोज हुए हैं. उन्होंने हमें ऐसे हेल्थवर्कस की लिस्ट बनाने को कहा. हमने लिस्ट तैयार कर प्रशासन को सौंप दी. इसके बाद हमें पता चला कि एक कमेटी गठित की गई है जो हर व्यक्ति विशेष पर फैसला लेगी कि उसे क्वारनटीन में भेजा जाए या नहीं.
सवाल 9- क्या ICMR की गाइडलाइंस का राज्य सरकार की ओर से पालन हो रहा है?
जूनियर डॉक्टर- पहली बात जब मरीज ओपीडी में आता है तो हम पूरी तरह सरकार को दोष नहीं दे सकते. मरीज हमसे जानकारी छुपाते हैं. जब तक मरीज हमें नहीं बताएगा कि उसे खांसी या ठंड है, हमें ये नहीं पता चल सकता कि वो संदिग्ध है या नहीं. ऐसी स्थिति में संक्रमण को फैलने से रोकने में एक ही चीज हमारी मदद कर सकती है और वो है- टेस्टिंग, टेस्टिंग और टेस्टिंग. जितनी अधिक से अधिक टेस्टिंग संभव हो उतनी की जानी चाहिए.
सवाल 10- आपका मतलब क्या अस्पताल में फिलहाल पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो रही?
जूनियर डॉक्टर- नहीं पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो रही.
सवाल 11- क्या मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने टेस्टिंग पर्याप्त नहीं होने के कुछ कारण बताए हैं?
जूनियर डॉक्टर- नहीं ऐसे कोई कारण प्रशासन ने नहीं बताए हैं. वो मैनपावर की कमी की बात करते हैं. कभी किट्स की किल्लत भी बताते हैं. साफ कारण कोई नहीं दिया जाता.
सवाल 12- क्या आप हमसे अपनी मनोस्थिति के बारे में कुछ कहना चाहेंगे जिससे आप गुजर रहे हैं? इंटर्न्स का मनोबल कैसा है?
जूनियर डॉक्टर- एक स्थानीय अखबार में रिपोर्ट हुआ है कि एक मेडिकल कॉलेज के 50 डॉक्टर्स को क्वारनटीन में भेजे जाने की आवश्यकता थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हमें पता चला कि प्रशासन की ओर से प्रेस को कहा गया कि वो खुद उन्हें क्वारनटीन भेज रहा है लेकिन असलियत इससे ठीक उलट थी. कई बार कुछ मरीज भी कुछ का कुछ बना देते हैं. एक महिला NRS में डिलिवरी के लिए आई. वहां उसे बताया गया कि ऑपरेशन किया जा सकता है. महिला ने मना कर दिया. लेकिन बाद में उसने इंटरव्यू दिया कि उसे अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया था.
सवाल 13- आप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से क्या अपील करना चाहेंगे?
जूनियर डॉक्टर- मेरी उनसे यही गुजारिश है कि जितने अधिकतम टेस्ट संभव हो सकें कराए जाएं. तभी हम इस संक्रमण पर काबू पा पाएंगे. अन्यथा बहुत मुश्किल होगा क्योंकि हमारी आबादी का जैसा घनत्व है उससे संक्रमण के ज्यादा फैलने की संभावना बनी रहती है.