कश्मीर में डीएसपी देविंदर सिंह के साथ पकड़े गए आतंकियों की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है. पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, ये आतंकी पाकिस्तान में भारत के सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाए हुए थे और पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ में आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे.
कई मोबाइल फोन नंबरों का इस्तेमाल करता था डीएसपी
जानकारी के मुताबिक डीएसपी कई मोबाइल फोन नंबरों पर एक्टिव था और आतंकवादियों से बात करने के लिए इनमें से कुछ नंबरों का इस्तेमाल करता था. सूत्रों के मुताबिक कुछ और आतंकी भी इनसे जल्द ही जुड़ने वाले थे.
डीएसपी का काम आतंकियों को ठहरने की व्यवस्था करना था
इस बात की भी संभावनाएं हैं कि ये आतंकवादी के निर्देशों के तहत खालिस्तान आतंकवादियों के संपर्क में भी थे. पकड़े गए डीएसपी देवेंद्र सिंह का काम चंडीगढ़ और दिल्ली में इन आतंकियों के लिए ठहरने की व्यवस्था करना था.
कई बार जांच हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से गिरफ्तार को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर को कई बार आगाह किया था, लेकिन कभी किस्मत तो कभी लापरवाही की वजह से डीएसपी देवेंद्र सिंह बार-बार बचता रहा. लेकिन 11 जनवरी को सुबह जब वो श्रीनगर से अपने आई-10 कार में अपने घर से निकला तो उसका गुडलक खत्म हो चुका था. जवाहर टनल से पहले पुलिस ने उसे हिज्बुल के दो टॉप आतंकियों के साथ गिरफ्तार कर लिया.
ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से बचता रहा देवेंद्र
डीएसपी देवेंद्र सिंह के करियर का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड भी बार-बार उसे कार्रवाई से बचाता रहा. एक सूत्र ने बताया, "आतंकवाद के खिलाफ अभियान में उसका काम जोरदार रहा, इस वजह से वो बचता रहा, कई बार जांच हुई, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया." सीआरपीएफ के एक दूसरे अधिकारी ने 1990 के उस दौर को याद किया जब देवेंद्र सिंह उत्तरी कश्मीर के सोपोर में आतंकियों के खिलाफ बड़ी बहादुरी से लड़ा था.
1990 के दशक में देवेंद्र सिंह 10 साल तक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के साथ काम किया. इस दौरान उसने सम्मान और जलन (ईष्या) दोनों कमाए. देवेंद्र सिंह को उसके काम के लिए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था और उसे इंस्पेक्टर बना दिया गया. आतंकियों के खिलाफ ऐसे ही एक ऑपरेशन के दौरान बड़गाम में देवेंद्र सिंह घायल हो गया था.