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एएमयू विवाद: समलैंगिक अधिकार संगठन होंगे लामबंद

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा पिछले दिनों अपने एक प्राध्यापक को कथित तौर पर समलैंगिक होने पर निलंबित करने के मामले ने एक बार फिर समलैंगिकता के मुद्दे को हवा दे दी है.

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा पिछले दिनों अपने एक प्राध्यापक को कथित तौर पर समलैंगिक होने पर निलंबित करने के मामले ने एक बार फिर समलैंगिकता के मुद्दे को हवा दे दी है.

समलैंगिकों के लिए काम करने वाले संगठन विश्वविद्यालय के इस कदम पर विरोध जताने के मूड में हैं. विश्वविद्यालय के आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के प्रमुख प्रो. श्रीनिवास सिरास को एक वीडियो टेप में कथित तौर पर एक व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाते दिखाया गया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित कर दिया. दिल्ली में समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था संगिनी ने कहा कि विश्वविद्यालय के इस कदम का संगठन विरोध करेगा.

संस्था की प्रोजेक्ट मैनेजर माया शंकर ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह कदम पूरी तरह गलत है. इस कदम का गैर सरकारी संगठन विरोध करेंगे और हम किसी भी तरह के विरोध का पूरी तरह समर्थन करेंगे. माया ने कहा ‘‘हर व्यक्ति को अपने अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है. इसमें किसी को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

समलैंगिक कार्यकर्ता करण ने कहा कि एक तरफ देश में न्यायालय द्वारा समलैंगिकों के अधिकारों पर बात हो रही है और दूसरी तरफ एक व्यक्ति को अपनी मर्जी से जीवन जीने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है. करण ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने के फैसले के बाद देश में समलैंगिकों के अधिकारों पर भी खुल कर बात होने लगी है. अब भी अगर समलैंगिकों को इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो हमें कानून की शरण लेने पर मजबूर होना पड़ेगा. करण ने कहा कि हम योजना बना रहे हैं कि प्राध्यापक को पूरा समर्थन दें. सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर विश्वविद्यालय के इस कदम का खुलकर विरोध करेंगे.

मुंबई आधारित गे राइट्स संस्था ‘एक कदम’ के संयोजक आशीष त्रिपाठी ने कहा कि समलैंगिकों को लेकर वातावरण में खुलापन आने के बाद ऐसा कदम अनापेक्षित है. त्रिपाठी ने कहा कि कुछ समय पहले क अगर किसी समलैंगिक व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार होता तो यह गलत होने के बाद भी स्वीकार कर लिया जाता, क्योंकि उस समय वातावरण इतना खुला नहीं था. अब जब समलैंगिकों को भी समाज में स्वीकार्यता मिल रही है, तब इस तरह का कदम हर तरह से अस्वीकार्य और अनापेक्षित है. त्रिपाठी ने कहा कि समलैंगिकों के साथ भेदभाव हमेशा से होता था, लेकिन अब हम इसका खुल कर विरोध करते हैं. विश्वविद्यालय के इस कदम का भी विरोध किया जाएगा.

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