इलाहाबाद संग्रहालय में शुक्रवार की शाम काव्य गोष्ठी आयोजन हुआ. महिला अधिकार से लिये सामाजिक उथल पुथल, बेटी के दर्द से लेकर सुबह और प्रकृति के बिगड़ रहें संयोजन को कवियों ने अपनी रचनाओं के संगम में पिरोया.
गोष्ठी के मुख्य अतिथि आरडीएसओ के निदेशक शैलेंद्र कपिल रहें. इस अवसर पर कवयित्री प्रीता बाजपेयी ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति और बेटी के जन्म को अपने काव्य में उकेरा. आकाशवाणी इलाहाबाद के लोकेश शुक्ला ने मिर्जा गालिब की नज्मों और जगजीत सिंह की गजलों से सराबोर किया.
कवि अनिल अरोड़ा ने दामिनी कांड को लेकर पुरुषों की प्रकृति और सोच पर प्रहार किया. वहीं इश्क की कविताओं को भी गुनगुनाया. कवि हितेश नन्दन ने भाई से भाई की सामाजिक दूरी और बटवारे के दर्द को काव्य रूप में पेश किया.
मोइन उस्मानी ने शैलेंद्र कपिल की लिखी गजलों को पेश किया. संग्रहालय से राजेश ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कवि निराला हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला के अंशों को सुनाया, उन्होंने ऐसे आयोजन को प्रोत्साहित करने के लिए शैलेंद्र कपिल का आभार व्यक्त किया.
उन्होंने संग्रहालय के प्रयास का भी जिक्र करते हुए हर स्तर पर सहयोग की बात कही. डॉक्टर प्रभाकर पांडेय ने भी काव्य पेश किया.
पूर्व पत्रकार और बीजेपी नेता विशाल सिंह ने सभी कवियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य हैं कि ऐसे विभूति कवियों साहित्यिक कवियों से उनकी रचनाओं को सुनकर सीखने को मिल रहा हैं. कवि के हर शब्द में कुछ सन्देश छिपा होता हैं जो अंतर्मन को छूता हैं और उस पर प्रभाव डालता हैं.
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष शैलेंद्र कपिल ने अपनी लिखित गजल को पढ़ा और सुबह और प्रकृति के सामंजस्य को उकेरा. उन्होंने कहा कि इलाहाबाद से उन्हें काफी कुछ साहित्य की विधा में सीखने को मिला. यहीं से उन्होंने शुरुआत की और काव्य की पांच संग्रह को लिखा.
उन्होंने आगे भी ऐसे आयोजन को बल दिया. ताकि साहित्यिक रचनाओं को सामने लाया जा सके. माँ की ममता और प्रकृति के दोहन को उन्होंने बखूबी अपनी रचनाओं में सुनाया.