मुंबई आतंकी हमलों का एकमात्र जीवित बचा हमलावर अजमल आमिर कसाब पाकिस्तान का एकमात्र कुख्यात कसाब नहीं है. देश में कम से कम दो और कसाब हैं, जो अपनी कट्टर धर्मांधता के कारण मौत का शिकार हुए.
देश के एक प्रमुख स्तंभकार नदीम एफ पारचा ने एक प्रमुख दैनिक अखबार में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है, इस नाम कसाब में ऐसा क्या है? पाकिस्तान में ही इस नाम के कम से कम तीन शख्स हैं और सभी धार्मिक कट्टरता के शिकार हैं. पारचा के अनुसार अजमल आमिर कसाब से पहले इस कुख्यात उपनाम वाला पहला शख्स युसूफ कसाब था, जिसे 1990 के दशक के शुरू में गिरफ्तार किया गया था. वह खुद को पैगम्बर बताता था इसलिए उसपर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. उसे जेल में उसके ही एक साथी कैदी ने मौत के घाट उतार दिया था.
दूसरा कसाब, जो अपनी धर्मांधता के कारण चर्चा में रहा वह था शेर मोहम्मद कसाब, जिसे हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने स्वात घाटी में एक अभियान के दौरान गिरफ्तार किया. पारचा ने उसे तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान का अव्वल कसाई बताया है. शेर मोहम्मद को सेना ने गोलीबारी के बाद गिरफ्तार किया और इस दौरान वह घायल भी हो गया. गिरफ्तारी के फौरन बाद उसकी मौत हो गई. पारचा इस बात से इनकार नहीं करते कि कसाब नाम के तीन व्यक्तियों का धर्मांध होना कोरा इत्तफाक भी हो सकता है, लेकिन यह घटनाएं एक चलन की तरफ तो इशारा करती ही हैं. पारचा ने लिखा है, ‘‘अगर कोई तीनों कसाब के जीवन से जुड़ी घटनाओं का सिलसिलेवार ढंग से पीछा करे तो उसे इस्लामी कट्टरवाद के पागलपन से जुड़ा एक ऐसा रास्ता नजर आएगा जो देश और समाज को बिखराव की तरफ ले जाता है.