एअर इंडिया के CMD अश्विनी लोहानी रेलवे बोर्ड के अगले चेयरमैन का पदभार संभालेंगे. ट्रेनों के लगातार दुर्घटनाग्रस्त होने के चलते रेलवे बोर्ड के चेयरमैन दे दिया है. दरअसल बार-बार हो रहे हादसों के कारण भारतीय रेल विभाग निशाने पर था, जिसके बाद मित्तल का यह इस्तीफा सामने आया है. रेलवे अफसर होने की वजह से अश्विनी लोहानी से उम्मीद है कि वह एक बार फिर रेलवे को पटरी पर वापस लाएंगे.वहीं पेट्रोलियम और नैचुरल गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और वित्त सलाहकार राजीव बंसल को एअर इंडिया का तीन महीने तक अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. नई नियुक्ति होने तक उन्हें एअर इंडिया का चेयरमैन और एमडी बनाया गया है.
को 2015 में एअर इंडिया का चेयरमैन बनाया गया था. इससे पहले वह मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के तौर पर काम कर रहे थे. अश्विनी लोहानी 1980 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफिसर हैं. उनकी लीडरशीप में मध्यप्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. लोहानी मैकेनिकल इंजीनियर है. साथ ही इंडियन स्टीम रेलवे सोसाइटी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. इसके अलावा सीआईआई नेशनल काउंसिल ऑफ टूरिज्म के सदस्य भी हैं. एअर इंडिया में उन्हें तीन साल तक की नियुक्ति मिली थी.
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन पद पर एके मित्तल का दो साल का एक्सटेंशन मिला था, जिसके बाद उन्हें 31 जुलाई 2018 तक इस पद पर बने रहना था. हालांकि उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसे के पीछे मानवीय चूक सामने आने के बाद से ही लोगों में भारतीय रेल और रेलमंक्षी सुरेश प्रभु को लेकर भारी नाराजगी थी.वहीं सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय भी सख्त कार्रवाई के पक्ष में बताया जा रहा था. ऐसे में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन मित्तल पर गाज गिरनी तय मानी जा रही थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मित्तल पिछले कुछ दिनों से स्वाइन फ्लू से बीमार होने के कारण छुट्टी पर थे. हालांकि इसके बावजूद वे बुधवार को रेल भवन पहुंचे और जरूरी फाइलें निपटाने के बाद रेलमंत्री सुरेश प्रभु को अपना इस्तीफा सौंप दिया.
बता दें कि उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बुधवार देर रात कैफियत एक्सप्रेस के 10 डिब्बे पटरी से उतर गए. आजमगढ़ से दिल्ली आ रही इस ट्रेन के हादसे के शिकार होने के कारण कम से कम 74 लोग घायल हो गए. यूपी में पिछले पांच दिनों के अंदर यह दूसरी बड़ी ट्रेन दुर्घटना है. इससे पहले उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर के खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में रेल अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई थी.