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भ्रष्टाचार की चोट खाए कर्नाटक में वोटिंग जारी

पांच वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार, षडयंत्र और अंतर्कलह का गवाह रहे कर्नाटक के मतदाता रविवार को नई विधानसभा को चुनने के लिए मतदान शुरू हो चुका है.

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कर्नाटक चुनाव
कर्नाटक चुनाव

कर्नाटक में सियासत का असली दंगल शुरू हो चुका है. विधानसभा के कुल 223 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. वोटिंग रविवार सुबह 7 बजे से जारी है. पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्‍पा वोट डाल चुके हैं, जबकि कई दिग्‍गज वोट डालने की तैयारी में हैं.

दांव पर लगी है बीजेपी की साख
कर्नाटक चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी की साख दांव पर लगी है. लिंगायत समुदाय के नेता येदियुरप्पा के बीजेपी से अलग होने के बाद पार्टी के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. उत्तरी कर्नाटक के 12 जिलों में लिंगायत समुदाय का दबदबा है, जो 95 विधायक चुनकर भेजता है. बीजेपी ने चुनाव में लिंगायत नेता जगदीश शेट्टार को ही आगे किया है. अगर आंकड़े की बात करें, तो इस समुदाय के पास राज्य का 21 फीसदी वोट है.

खास बात यह है कि गर्मी की वजह से वोटिंग का वक्‍त 1 घंटा बढ़ा दिया गया है. शाम 6 बजे तक वोट डाले जा सकेंगे. 5 वर्षों तक बीजेपी के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार, षड्यंत्र और अंतर्कलह का गवाह रहे कर्नाटक के मतदाता नई विधानसभा चुनने के लिए उत्‍साह के साथ पोलिंग बूथों पर कतार में खड़े हैं.

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इस चुनाव पर पूरे देश की नजर टिकी है, क्योंकि राज्य की सत्ताधारी बीजेपी और केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपने प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक दूसरे को घेरती रहीं. चुनाव का परिणाम 8 मई को सामने आएगा.

इस चुनाव पर देश की नजर इसलिए भी है कि दक्षिण के किसी राज्य में बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिलाने वाले बी.एस. येदियुरप्पा अब उसके साथ नहीं हैं. उन्होंने अपनी कर्नाटक जनता पार्टी (केजेपी) बनाई और मैदान में हैं.

खनन रिश्वत आरोपों के कारण येदियुरप्पा को जुलाई 2011 में मुख्यमंत्री पद त्यागना पड़ा था. उन्होंने बार-बार दोहराया है कि उनका मकसद बीजेपी को राज्य से समूल नष्ट करना है. विधानसभा की 225 सीटों में से 223 सीटों के लिए मतदान कराए जाएंगे.

एक सदस्य एंग्लो-इंडियन समुदाय से मनोनीत किए जाते हैं. मैसूर जिले की पेरियापाटना निर्वाचन क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी एस मोगेगौड़ा के निधन के कारण वहां चुनाव बाद में कराए जाएंगे.

करीब 2 करोड़ 16 लाख महिला मतदाता समेत 4 करोड़ 36 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. चुनावी दंगल में शामिल अन्य दलों में जनता दल-सेक्युलर (जद-एस), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रांकापा), समाजवादी पार्टी (सपा), जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू), मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और जेल में बंद जी जनार्दन रेड्डी और बीजेपी के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु की पार्टी बीएसआर कांग्रेस हैं.

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चुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस, जद-एस और केजेपी के बीच है. उत्तरी कर्नाटक के 12 जिलों जहां विधानसभा की 90 सीटें आती हैं, में मुकाबला त्रिकोणीय रहने के आसार हैं. यहां बीजेपी, कांग्रेस और केजेपी के बीच संग्राम होगा.

बैंगलोर शहरी की 28 सीटों समेत दक्षिणी कर्नाटक के 11 जिलों की 88 सीटों पर मुकाबला कांग्रेस और जद-एस के बीच होगा क्योंकि बैंगलोर शहरी क्षेत्र को छोड़ बीजेपी का इलाके में जनाधार कमजोर है.

तीन तटीय जिलों दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ की सम्मिलित 19 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है. मध्य कर्नाटक के चार जिलों की 26 सीटों पर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही टक्कर होगी.

बीजेपी की ओर से प्रचार अभियान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली उतरे. कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रचार किया. जद-एस के स्टार प्रचारकों में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा और उनके बेटे व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी रहे.

केजेपी की तरफ से येदियुरप्पा ही सर्वेसर्वा बने रहे. बसपा की मायावती, जद-यू से शरद यादव और माकपा के प्रकाश करात ने भी अपनी-अपनी पार्टी का प्रचार किया.

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