गृह मंत्री अमित शाह के देश को एकजुट करने के लिए हिंदी भाषा पर अहमियत दिए जाने की बात कहे जाने पर हिंदी को लेकर बहस शुरू हो गई है. ज्यादा विरोध के सुर दक्षिण भारत से सुनाई दे रही है. कई दिग्गजों की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद अब नेता से अभिनेता बने रजनीकांत ने भी 'वन नेशन, वन लैंग्वेज' का विरोध किया है.
'वन नेशन, वन लैंग्वेज' का विरोध करते हुए फिल्म अभिनेता रजनीकांत ने कहा कि हिंदी भाषा को किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए. सिर्फ तमिलनाडु नहीं दक्षिण का कोई भी राज्य हिंदी को स्वीकार नहीं करेगा. सिर्फ हिंदी ही नहीं. किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए.
Rajinikanth: Hindi shouldn't be imposed. Not just Tamil Nadu but none of the southern states will accept imposition of Hindi. Not only Hindi, no language should be imposed. If there's a common language it's good for country's unity&progress but forcing a language isn't acceptable pic.twitter.com/cP3KzihTgw
— ANI (@ANI) September 18, 2019
अमित शाह के बयान से खफा
गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर घोषणा की थी कि 2020 से सार्वजनिक रूप से 'हिंदी दिवस' मनाया जाएगा. शाह ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव तक हिंदी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी. गृह मंत्री ने लोगों से हिंदी भाषा के साथ जुड़ने और इसे दुनिया में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल करने की दिशा में काम करने की अपील की.
अमित शाह के हिंदी वाले इस बयान के बाद विरोध के स्वर मुखर होते जा रहे हैं. दक्षिणी राज्यों के नेताओं का इस पर ऐतराज जताने का सिलसिला जारी है. इन नेताओं में बीजेपी नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी शामिल हैं.
कमल हासन ने जताई नाराजगी
अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने हिंदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने कहा कि 'शाह, सुलतान या सम्राट' को विविधता में एकता के वादे को तोड़ना नहीं चाहिए, जिसे भारत को गणराज्य बनाने के समय किया गया था.
अमित शाह के ट्वीट के जवाब में डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि यह चौंकाने वाला है. यह निश्चित रूप से भारत की एकता को प्रभावित करेगा. मैं डीएमके की ओर से उनसे अपील करता हूं कि वह अपने विचार वापस लें.
तो वहीं कर्नाटक में अमित शाह की ही पार्टी के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने हिंदी की तुलना में कन्नड़ भाषा पर जोर दिया और कहा कि वे कन्नड़ संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.
इसके अलावा पीएमके के संस्थापक एस रामदास ने भी ट्वीट कर नाराजगी जताते हुए कहा कि भारत की एकल भाषा होने के लिए हिंदी पर शाह के विचार गलत हैं. उन्हें हिंदी दिवस पर हिंदी भाषा के बारे में बोलने का अधिकार है. लेकिन अन्य भाषाओं को बोलने वाले लोगों पर हिंदी नहीं थोपी जा सकती.