'आप' की अंदरूनी कलह जारी है . इसमें लेटेस्ट डॉक्यूमेंट एक पत्र के रूप में सामने आया है. विधायकों की ओर से आप नेता अरविंद केजरीवाल को संबोधित इस पत्र में कहा गया है कि किस तरह योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और शांति भूषण पार्टी को नुकसान पहुंचाते रहे हैं और अगर इनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी खत्म हो जाएगी. आगे लिखा है, "उम्मीद है कि आप हम सब की बातों को गंभीरता से लेंगे और इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर बाकी लोगों के सामने एक नजीर पेश करेंगे." इस पत्र के सामने आने से पहले ही योगेंद्र यादव ने कहा था, "उन्हें हमारे खिलाफ बोलने के लिए या हमारे खिलाफ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दिल्ली के विधायकों पर दबाव नहीं डालना चाहिए।"
आइए आप के कलह की अब तक की कहानी आप नेताओं की जुबानी ही सुनते हैं.
"प्रशांत भूषण, उनके पिता शांतिभूषण और बहन शालिनी मिलकर पार्टी को एक परिवार की पार्टी बनान चाहते हैं. 'भूषण तिकड़ी' पार्टी के हर विंग पर शिकंजा चाहता है." - आशीष खेतान
"ये सब पार्टी के अंदरूनी मामले हैं. मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोलूंगा. मैंने पार्टी के ढांचे में बदलाव को लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी को एक ख़त लिखा था. इसे विद्रोह की तरह नहीं देखा जाना चाहिए." - प्रशांत भूषण
"मुझे भूषण के बारे में सार्वजनिक तौर पर ऐसा नहीं कहना चाहिए था. हमने कई मुद्दों पर साथ लड़ाई लड़ी है और उम्मीद है कि हम आगे भी साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करेंगे." - आशीष खेतान
"मैं कुछ भी बोलूंगा तो मैं कंट्रोवर्सी में फंस जाऊंगा. पीएसी का सदस्य हूं इसलिए हमेशा सोच-समझकर कवि सम्मेलनों में भी बोलता हूं." - कुमार विश्वास
"यह वक़्त बड़ी जीत के बाद बड़े मन से, बड़े काम करने का है. देश ने हमसे बड़ी उम्मीदें लगाई हैं. छोटी हरकतों से खुद को और इस आशा को छोटा न करें." - योगेंद्र यादव
''मैं इस झगड़े में नहीं पडूंगा, बल्कि दिल्ली में सरकार चलाने पर ध्यान दूंगा. जनता के भरोसे को किसी भी हालत में नहीं टूटने दूंगा." - अरविंद केजरीवाल
"आप में मंथन का वक़्त. ये दो तरह के विचारों के बीच मतभेद है. एक तरफ़ हैं कट्टर वामपंथी विचारधारा जो कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करती हैं तो दूसरी ओर विकास में यक़ीन करने वाली विचारधारा." - आशुतोष
“मेरा मानना है कि हमें अपनी नीति संबंधी सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए, जबकि अरविंद को लगता है कि राजनीति में समझौते करने पड़ते हैं.” - प्रशांत भूषण
"जो लोग अर विंद केजरीवाल को संयोजक पद से हटाना चाहते हैं क्या उन्हें देश के कार्यकर्ताओं की भावना का ख्याल है?" - संजय सिंह
"पार्टी के पद पर होना योग्यता-अयोग्यता नहीं आंकता और अगर आप में ताकत है, आप सत्य के साथ हैं, जनता आपकी बात स्वीकार करती है और वोटों को अपनी ओर लाने का कौशल है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां काम करते हैं और किस तरह से काम कर रहे हैं." - कुमार विश्वास
"प्रशांत जी और मेरे बारे में चल रही खबरें सुन रहा हूं, पढ़ रहा हूं. नई नई कहानियां गढ़ी जा रही हैं, आरोप मढ़े जा रहे हैं, षड्यंत्र खोजे जा रहे हैं. ये सब पढ़ के हंसी भी आती है और दुख भी होता है. हंसी इसलिए आती है कि कहानियां इतनी मनगढ़ंत और बेतुकी हैं. लगता है कहानी गढ़ने वालों के पास टाइम कम होगा और कल्पना ज्यादा." - योगेंद्र यादव
"अगर न्यूनतम अनुशासन नहीं होगा तो कोई भी संगठन खड़ा नहीं रह सकता. व्यक्ति का महत्व है लेकिन संगठन सबसे बड़ा है." - आशुतोष
"26 फरवरी की रात को जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अरविंद केजरीवाल से मिलना चाहते थे, तो अरविंद ने ये संदेश दिया कि अगर ये दो सदस्य पीएसी में रहेंगे तो वो संयोजक के तौर पर कार्य नहीं कर पाएंगे. 4 मार्च को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की यही पृष्ठभूमि थी." - मयंक गांधी
"जब पार्टी का हर कार्यकर्ता दिल्ली में चुनाव जीतने की कोशिश में जुटा था, उस दौरान ये दोनों नेता पार्टी को हराने की दिशा में काम कर रहे थे." - आप का आधिकारिक बयान
"उम्मीद है कि इस बयान से सभी लांछन, आरोपबाजी खत्म हो जाएगी. उम्मीद है कि इस मुद्दे पर पार्टी कार्यकर्ताओं और दिल्ली के विधायकों के साथ जबर्दस्ती नहीं की जाएगी. उम्मीद है कि प्रशांत भूषण और मेरी प्रतिक्रिया भी पार्टी मीडिया में जारी करेगी। उम्मीद है कि पार्टी के बेवसाइट को सभी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया के लिए खोल दिया जाएगा." - योगेंद्र यादव
"पिछले 4 सालों में हमें तोड़ने और खरीदने की कोशिश हुई. हमें क्या-क्या प्रलोभन नहीं दिए गए. राज्यसभा से लेकर केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री बना देने तक का ऑफर दिया गया. यहां तक कि दबाव दिया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं से अपील है कि वे धार कुंद ना होने दे." - कुमार विश्वास
"हम लोग एक और राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे, जो किसी तरह से चुनाव जीतने की सिर्फ एक मशीन बन जाए." - योगेंद्र यादव
''पार्टी में जो कुछ भी हो रहा है, मैं उससे बहुत दुखी व आहत हूं. दिल्ली की जनता ने हम पर जो भरोसा जताया है, उससे धोखा है.'' - अरविंद केजरीवाल
"कुछ लोग सुबह शाम टीवी इंटरव्यू देंगे, कुछ दिल्ली और फिर देश के विकास के लिए दिन रात काम करेंगे. कुछ लोग ब्लॉग लिखेंगे, कुछ इतिहास लिखेंगे." - आशीष खेतान