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संसद में गूंजा किसानों पर फायरिंग का मसला

पुणे में पुलिस फायरिंग में हुई किसानों की मौत का मामला मुंबई से दिल्ली तक गूंजा. महाराष्ट्र विधानसभा से लेकर संसद में लोकसभा तक विपक्ष के निशाने पर महाराष्ट्र सरकार रही.

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पुणे में पुलिस फायरिंग में हुई किसानों की मौत का मामला बुधवार को मुंबई से दिल्ली तक गूंजा. महाराष्ट्र विधानसभा से लेकर संसद में लोकसभा तक विपक्ष के निशाने पर महाराष्ट्र सरकार रही.

शिवसेना और दूसरे विपक्षी सदस्यों ने पुणे में किसानों पर फायरिंग के सवाल को लेकर सरकार को घेरा. लोकसभा में तो महाराष्ट्र सरकार की बर्खास्तगी को लेकर शिवसेना के सांसद सदन के वेल में जा पहुंचे.

बीजेपी ने भी शिवसेना के सुर में सुर मिलाया. लेकिन सबसे मजेदार बात ये रही कि शिवसेना की धुर विरोधी समाजवादी भी इस मसले पर शिवसेना के साथ वेल में जा पहुंची.

उधर महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष ने इस बात पर हंगामा किया कि सरकार पुणे में किसानों पर पुलिस फायरिंग की निष्पक्ष जांच कराए. शिवसेना के हंगामे की वजह से लोकसभा से लेकर महाराष्ट्र विधानसभा तक को स्थगित करना पड़ा.

क्या है पूरा मसला
पुणे एक्सप्रेस हाइवे पर मंगलवार को किसान इस बात के लिए रास्ता जाम कर रहे थे कि पावना बांध का पानी पहले उनके खेतों में जाना चाहिए, ना कि शहर में. इस बात पर पुलिस से उनकी झड़प हो गयी. हालात को काबू पाने के चक्कर में पुलिस ने फायरिंग की जिसमें चार किसानों की मौत हो गयी.

शुरुआत रास्ता जाम से हुई, लेकिन जल्दी ही किसानों का गुस्सा भड़क उठा. उन्होंने हाइवे पर चल रही बसों और कारों को तहस-नहस करना शुरू कर दिया.

पुणे के डेहू गांव के पास पुलिस ने जब किसानों को रोका तो बात बिगड़ती चली गई. पुलिस पर किसानों ने पथराव किया, तो जवाब मिला लाठियों और फिर गोलियों से.

किसानों का ये आंदोलन तीन साल पुराना है. वो 2008 से ही पावना डैम से पिंपरी चिंचवाड़ तक पाइप लाइन बिछाने का विरोध कर रहे हैं. किसानों को डर है कि पाइप लाइन बन जाने से उन्हें सिंचाई के लिए भरपूर पानी नहीं मिलेगा. मंगलवार को इसी मुद्दे पर बीजेपी, शिवसेना और भारतीय किसान संघ की अगुवाई में किसानों ने पुणे एक्सप्रेस वे जाम किया था.

आंदोलन हिंसक होने के बाद महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों में ज़बर्दस्त हंगामा हुआ. विपक्ष का आरोप था कि पुलिस ने किसानों पर ज़्यादती की है.

शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा, किसानों पर फायरिंग के लिए संबंधित विभाग जिम्मेदार है. आखिर समस्या को इस स्तर तक गंभीर क्यों होने दिया गया? किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना चाहिए, हम इसका समर्थन करते हैं. हमें महसूस होता है कि ये सरकार पूरी तरह नाकाम है.’

फिलहाल फायरिंग के बाद पुणे में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है. लेकिन, इलाके में तनाव बरकरार है.

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