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तेलंगाना रिपोर्ट को ‘खुले दिमाग’ से पढ़ें: चिदंबरम

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों से अपील की कि तेलंगाना के मुद्दे पर जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों को ‘खुले दिमाग’ से पढ़ें और इस बारे में उन्हें अपना ‘निष्पक्ष नजरिया’ बताएं.

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों से अपील की कि तेलंगाना के मुद्दे पर जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों को ‘खुले दिमाग’ से पढ़ें और इस बारे में उन्हें अपना ‘निष्पक्ष नजरिया’ बताएं.

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस रिपोर्ट से इस मामले पर ‘जानकार और परिपक्व’ बहस शुरू हो सकेगी.

राज्य के राजनीतिक दलों के नेताओं को एक बैठक के दौरान रिपोर्ट की प्रतियां सौंपते हुए चिदंबरम ने उनसे आग्रह किया कि वह कमेटी की सिफारिशों पर अपना ‘सबसे सजग, विचारपूर्ण और निष्पक्ष’ नजरिया उन्हें बताएं.

उन्होंने नेताओं से कहा कि वह रिपोर्ट को ‘खुले दिमाग’ से पढ़ें और इस मामले पर अलग विचार रखने वालों की बात सुनने और उन्हें अपनी बात सुनाने के लिए भी तैयार रहें.

चिदंबरम ने टीआएस, टीडीपी और भाजपा द्वारा बैठक का बहिष्कार किए जाने पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा, ‘सरकार को उम्मीद है कि इस रिपोर्ट से एक जानकार और परिपक्व बहस शुरू होगी.’ पिछले वर्ष पांच जनवरी के विचार विमर्श का स्मरण करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि उससे आगे के रास्ते पर चलने में मदद मिली, जिसके बाद निष्कर्ष, अध्ययन, विश्लेषण, विकल्प और सिफारिशों का रास्ता खुला. उन्होंने कहा कि सरकार को इस रिपोर्ट से और आगे का रास्ता खुलने की उम्मीद है.

चिदंबरम ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि राजनीतिक दल, आंध्र प्रदेश के लोग चाहे वह समूह हों या व्यक्ति, इस संबंध में अमूल्य सिफारिशें देंगे, जिससे आगे का मार्ग प्रशस्त होगा.’ उन्होंने कहा, ‘आपने देखा होगा कि मैंने बार बार ‘आगे के रास्ते’ की बात की है. सरकार न्यायिक, सम्मानित और व्यवहारिक समाधान खोजना चाहती है, जिसमें सभी पक्षों के समर्थन के व्यापक प्रयास मौजूद हों.’

{mospagebreak} 5 जनवरी की बैठक में आंध्र प्रदेश के लोगों से शंति बनाए रखने की अपील का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उसका उल्लेखनीय असर हुआ था. उन्होंने कहा, ‘यह जरूरी है कि राज्य में शांति, सौहार्द और कानून एवं व्यवस्था बनी रहे. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस बैठक के बाद भी आप मेरे साथ मिलकर पिछले साल जैसी ही अपील करें.’

गृह मंत्री ने कहा कि पार्टियों को रिपोर्ट को पढ़ने और इसके बारे में अपने संगठन में सलाह मशवरा करने के लिए समय चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर पार्टियां सहमत होंगी तो वह इस महीने बाद में किसी दिन सहूलियत से फिर मिल सकते हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी, कांग्रेस के नेताओं के एस राव, उत्तम कुमार रेड्डी, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डीवी राघवुलू और पार्टी नेता जे रंगा, पीआपी नेता सी रामचंद्रैया, एमआईएम के अकरबुद्दीन ओवैसी और सैयद अहमद पाशा कादरी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के के नारायण और जी मलेश ने इस बैठक में शिरकत की.

टीडीपी के सांसद किशटप्पा ने पहले चिदंबरम से मुलाकात की और पार्टी की तरफ से उन्हें एक पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया था कि वह बैठक में भाग नहीं ले रहे हैं क्योंकि इस बारे में केन्द्र को फैसला करना है राजनीतिक दलों को नहीं.

पार्टियों के बायकाट का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि कुछ दलों ने बैठक में भाग न लेने का फैसला किया.

उन्होंने कहा, ‘मैं उन दलों द्वारा लिए गए फैसले पर गहरा खेद व्यक्त करता हूं. यह जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा किए गए अमूल्य कार्य के प्रति न्याय नहीं है. लेकिन फिर भी मैं रिपोर्ट की एक प्रति उन पार्टियों को भी भेजने का प्रस्ताव रखता हूं, जिन्होंने इस बैठक में भाग न लेने का फैसला किया.’

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