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आर्थिक सुधारों के लिये कदम बढ़ा रहा है भारत: प्रणव मुखर्जी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अमेरिकी सरकार, शोध संस्थान तथा उद्योग जगत के इस विचार को सिरे से नकार दिया है कि भारत में आर्थिक सुधार की गति धीमी है. उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि कई क्षेत्रों में सुधार जारी है जिससे आने वाले दिनों में आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी.

प्रणव मुखर्जी प्रणव मुखर्जी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अमेरिकी सरकार, शोध संस्थान तथा उद्योग जगत के इस विचार को सिरे से नकार दिया है कि भारत में आर्थिक सुधार की गति धीमी है. उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि कई क्षेत्रों में सुधार जारी है जिससे आने वाले दिनों में आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी.

हालांकि मुखर्जी ने कहा कि भारत में सुधार के लिये राजनीतिक आमसहमति की जरूरत है जिसपर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है.

उन्होंने सोमवार को यहां कहा कि आर्थिक सुधार एक सतत प्रक्रिया है और संप्रग सरकार इसको लेकर प्रतिबद्ध है.

‘भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय सहयोग’ पर आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आप और सुधार करते है, इसके बाद अतिरिक्त सुधार की जरूरत पड़ती है. इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ तथा वाशिंगटन स्थित शोध संस्थान ने किया था.

दूसरे भारत-अमेरिकी आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग चर्चा में भाग लेने के लिये उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कल यहां पहुंचे मुखर्जी ने कहा कि ढांचागत सुधार के मामले में हमने कुछ कदम उठाये हैं.

उन्होंने कहा कि हमने हाल में ही रिण बांड के लिये दिशा-निर्देश को अंतिम रूप दिया है. हमने यह भी निर्णय किया है कि एफडीआई ज्यादा निवेशक अनुकूल हो तथा इससे संबंधित दिशानिर्देश को लेकर व्यापक दस्तावेज बनाया गया है जिसकी हर छह महीने में समीक्षा होगी. इसका मकसद विदेशी निवेशकों के लिये एफडीआई नीति के मामले में और स्पष्टता लाना है.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि संसद के पिछले सत्र में बैंकिंग, बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने तथा पेंशन कोष नियमन से जुड़े विधेयक पेश किये गये हैं. उन्होंने उम्मीद जतायी कि ये विधेयक संसद में जल्दी ही पारित हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि कर क्षेत्र में भी व्यापार सुधार के लिये कदम उठाये जा रहे हैं.

अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेटनर की ओर मुखातिब होते हुए, उन्होंने कहा कि लेकिन मैं मंत्री गेटनर से कहना चाहूंगा कि हमारी प्रणाली में हमें अन्य दलों के साथ आमसहमति बनानी होती है क्योंकि संसद में कानून को पारित कराने के लिये हमारे पास उस प्रकार का बहुमत नहीं है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले, गेटनर ने भारत से आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये अगली पीढ़ी के सुधारों में तेजी लाने को कहा था.

उन्होंने कहा कि 1990 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तत्कालीन वित्त मंत्री के रूप में आर्थिक सुधार को गति दी थी जिसका लाभ आज भारत उठा रहा है लेकिन भारत अब ऐसी जगह है जहां भविष्य में तेज आर्थिक वृद्धि वित्तीय क्षेत्र समेत विभिन्न क्षेत्रों में अगली पीढ़ी के सुधार पर निर्भर है.

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