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चीन के साथ व्यापार घाटा कम करने की जरूरतः मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के साथ व्यापार घाटे में कमी लाने के लिए चीन को निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया है और भरोसा जताया है कि 2015 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डालर का स्तर पार कर जाएगा.

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मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह

ने चीन के साथ व्यापार घाटे में कमी लाने के लिए चीन को निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया है और भरोसा जताया है कि 2015 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डालर का स्तर पार कर जाएगा.

चीन की समाचार एजेन्सी शिन्हुआ के साथ एक भेंटवार्ता में सिंह ने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि हम 2015 तक 100 अरब डालर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य पार कर जाएंगे. लेकिन हमें व्यापार घाटा कम करने के लिए चीन को भारतीय निर्यात बढ़ाना होगा.’

उन्होंने कहा कि पिछले साल दिसंबर में चीनी प्रधानमंत्री वेन चियापाओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देश व्यापार एवं आर्थिक सहयोग में संतुलन स्थापित करने के लिए कई उपाय अपनाने पर सहमत हुए थे.

वर्ष 2010 में भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डालर से अधिक था जिसमें भारत के लिए व्यापार घाटा 20 अरब डालर से अधिक रहा. वर्ष 2009 में यह व्यापार घाटा 15.87 अरब डालर था, जबकि 2008 में यह 11.18 अरब डालर था.

सिंह ने कहा, ‘भारत और चीन के शांतिपूर्ण विकास से ब्रिक्स मजबूत होगा और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छा होगा.’ उन्होंने कहा कि विश्व में दो सबसे बड़े विकासशील देश भारत और चीन पर चौतरफा एवं टिकाउ सामाजिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.

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सान्या में पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सदस्य देशों को अपनी ताकत जोड़नी चाहिए और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना चाहिए. सिंह ने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में भारत और चीन अहम योगदान कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों में तेज गति से आर्थिक विकास हो रहा है जिससे हमारे लोगों की आकांक्षाएं पूरी हो रही हैं और वैश्विक मांग बढ़ रही है.’ प्रधानमंत्री ने माना कि चीन और भारत अपने और अन्य सहयोगी विकासशील देशों के हित वाले मुद्दों पर वैश्विक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

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