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मुगा रेशम जापान में होता जा रहा है लोकप्रिय

अमेरिका, यूरोप और पश्चिम एशिया में ग्राहकों को आकर्षित करने के बाद असम का प्रसिद्ध मुगा रेशम जापान में लोकप्रियता हासिल कर रहा है और जापान उसके लिए सबसे बड़ा बाजार बनकर उभर सकता है.

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मुगा रेशम
मुगा रेशम

अमेरिका, यूरोप और पश्चिम एशिया में ग्राहकों को आकर्षित करने के बाद असम का प्रसिद्ध मुगा रेशम जापान में लोकप्रियता हासिल कर रहा है और जापान उसके लिए सबसे बड़ा बाजार बनकर उभर सकता है.

सिल्क मार्क ओर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक एस के मेनन ने कहा कि जापान में डिजायनर किमोनोस तथा अन्य पारंपरिक परिधानों की सिलाई में मुगा सिल्क का इस्तेमाल कर रहे हैं.

मेनन ने कहा, ‘मुगा पहले ही दक्षिण अफ्रीका एवं मध्यपूर्व के अलावा अमेरिका तथा कई यूरोपीय देशों में अपनी उपस्थिति महसूस करा चुका है और अब उसने जापान में भी अपार सफलता हासिल की है.’

उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 में जीआई पंजीकरण हासिल करने वाले रेशम के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग काफी है और असम इस दुर्लभतम श्रेष्ठ रेशम का एकमात्र उत्पादक है.

उन्होंने कहा, ‘मुगा असम का विशिष्ट उत्पाद है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी काफी मांग है क्योंकि वे मुगा रेशम जैसा रेशम का उत्पादन करने में अक्षम हैं.’

मेनन ने कहा कि एरी रेशम भी एक ऐसा धागा है जो उचित तरीके से विज्ञापन करने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार हासिल कर सकता है. उन्होंने अफसोस भरे लहजे में कहा, ‘भारत रेशम का बहुत बड़ा बाजार है. हर अवसर के लिए हमें रेशम की जरूरत होती है. हालांकि देश में खूब संभावनाएं हैं लेकिन बुनियादी ढ़ाचे की कमी देश को पिछली सीट पर ले जाती है.’

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उन्होंने कहा कि भारत दूसरा सबसे बड़ा दूसरा रेशम उत्पादक देश है और कुल रेशम का 90 फीसदी भाग का उत्पादन असम करता है, इसके बाद भी 10 हजार टन रेशम की कमी है तथा देश चीन के आयात खासकर चीन से आयात पर मूल्यवान विदेश मुद्रा खर्च करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, ‘हम चीन से 8000 टन से अधिक रेशम का आयात करते हैं क्योंकि हम घरेलू मांग पूरी नहीं कर पाते. हालांकि भारत 220000 टन रेशम का उत्पादन करता है उसके बाद भी 10 हजार रेशम का कमी रहती है.’

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