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उत्तर भारत में 10 जुलाई तक मानसून की बारिश

कृषि शोध संस्था आईसीएआर ने आज कहा है कि धान फसल की बुवाई के प्रभावित होने की संभावना नहीं है क्योंकि देश के उत्तरी भाग में मानसून के 10 जुलाई तक पहुंचने की उम्मीद है.

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कृषि शोध संस्था आईसीएआर ने आज कहा है कि धान फसल की बुवाई के प्रभावित होने की संभावना नहीं है क्योंकि देश के उत्तरी भाग में मानसून के 10 जुलाई तक पहुंचने की उम्मीद है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एस अयप्पन ने यहां आम महोत्सव के मौके पर बताया, मानसूनी बरसात कल से बढ़ी है और 10 जुलाई तक यह उत्तरी क्षेत्र को अपने दायरे में ले लेगा और धान फसल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा.

मानसून 31 मई को शुरू होने के बाद 18 जून से आगे नहीं बढ़ा है. उस समय तक इसने आधे देश को अपने दायरे में लिया था. मौसम विभाग ने कहा कि चालू सत्र में वाषिर्क बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही है जिसका कारण बरसात की धीमी प्रगति है.

अयप्पन ने कहा कि मौसम विभाग के अधिकारियों की भविष्यवाणी के अनुसार देश में सामान्य से अधिक बरसात होगी.

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मानसूनी बरसात खरीफ फसल के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय कृषि का 60 फीसदी से भी अधिक हिस्सा वष्रा सिंचित है. धान के मामले में 4.3 करोड़ हेक्टेयर का करीब 40 प्रतिशत भाग ही वष्रासिंचित हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार किसानों ने जून तक करीब 46.46 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की है जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 45.43 लाख हेक्टेयर था.

किसान धान एवं अन्य फसलों की बुवाई का काम खरीफ सत्र (गर्मी) में दक्षिण पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू करते हैं जो सितंबर तक जारी रहता है.

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