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आखिरी दौर में पहुंची राहुल की किसान यात्रा

राहुल गांधी की किसान संदेश यात्रा अपने आख़िरी दौर में पहुंच चुकी है. पदयात्रा की तीसरी रात उन्होंने एक दलित के घर काटी. वैसे राहुल के काफ़िले में सौ-डेढ़ सौ लोगों के खाने-पीने का ज़बरदस्त इंतज़ाम है, लेकिन राहुल गांधी हर बार किसी गांववाले का घर चुनते हैं. मामला सियासत का जो है.

राहुल गांधी राहुल गांधी

राहुल गांधी की किसान संदेश यात्रा अपने आख़िरी दौर में पहुंच चुकी है. पदयात्रा की तीसरी रात उन्होंने एक दलित के घर काटी. वैसे राहुल के काफ़िले में सौ-डेढ़ सौ लोगों के खाने-पीने का ज़बरदस्त इंतज़ाम है, लेकिन राहुल गांधी हर बार किसी गांववाले का घर चुनते हैं. मामला सियासत का जो है.

दिन फूटते ही उठते हैं और सूरज के साथ ही राहुल निकल पड़ते हैं, कच्ची-पक्की डगर पर. पिछले तीन दिनों से यही सिलसिला है. बीती रात राहुल ने अलीगढ़ के मरोरगढ़ी गांव में एक बंजारे के घर गुजारी.

दलित समुदाय के रघुवीर बंजारा के घर ना पंखा है, ना बिजली और ना ही घर तक पहुंचने के लिए सड़क. तो क्या राहुल ने रात के खाने और ठहरने के लिए जान बूझकर दलित का घर चुना ? ताकि मायावती के राज में कांग्रेस के दलित प्रेम की नुमाइश हो सके.

वैसे ये राहुल ही हैं जो खाना खाने और रैन बसेरा करने के लिए अलग घर ढूंढ लेते हैं, वर्ना उनके साथ उनकी पूरी टीम चल रही है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ये टीम पूरे काफ़िले के लिए इंतज़ाम करती है. लज़ीज़ खाना बनाने के लिए 8 रसोइए हैं जो नाश्ता-खाना सब तैयार करते हैं.

मिलना-जुलना, खाना-पीना तो ख़ैर अपनी जगह है, अब असल मसला शनिवार को अलीगढ़ में होने वाली किसान महापंचायत का है, जिसके लिए राहुल गांवों की ख़ाक छानने निकले हैं.

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