भारत में एक अध्ययन के अनुसार युवा पीढ़ी को एक साल में औसतन 22 छुट्टियां ही मिल पाती हैं. इस तरह से देश के युवा छुट्टियों से वंचित रहने के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर हैं.
अध्ययन में शामिल 35 प्रतिशत लोग तो एक साल में 15 से ज्यादा छुट्टियों का लाभ नहीं उठा सके. सर्वेक्षण में यह रोचक तथ्य भी सामने आया कि करीब 22 फीसदी भारतीयों ने कहा कि अपनी साल भर की सारी छुट्टियों का लाभ उठाने में उनके बॉस मददगार नहीं होते. औसतन भारतीयों को एक साल में 26 छुट्टियां मिलती हैं, लेकिन वे केवल 22 का फायदा उठा पाते हैं.
एक वेबसाइट ने 11 देशों में प्रबंधकीय और इससे उच्च स्तर के पेशेवर युवाओं के बीच दिसंबर 2010 में सर्वेक्षण कराया था, जिसमें प्रत्येक देश में एक हजार के आसपास लोगों ने भाग लिया.
सर्वेक्षण में छुट्टियों से वंचित युवा वर्ग के मामले में जापान सबसे ऊपर रहा, जहां लोगों को औसतन 9 दिन की वार्षिक छुट्टियां मिलती हैं. अमेरिका में यह आंकड़ा औसतन 14 दिन और ऑस्ट्रेलिया में 16.5 दिन रहा.{mospagebreak}
भारत में 'एक्सपीडिया' वेबसाइट ने पहली बार सर्वेक्षण कराया, जिसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलूर में कराया गया. सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक भारतीय भागीदारों ने कहा कि छुट्टियों के दौरान उनके आधिकारिक ईमेल और कामकाजी एसएमएस या संदेश उनकी छुट्टियों का मजा खराब करते हैं.
यह बात भी सामने आई है कि भारतीय लोग अवकाश लेने में अपने परिवार के सदस्यों की छुट्टियों को भी ध्यान में रखते हैं. करीब 18 प्रतिशत लोगों के अनुसार उन्होंने इसलिए अपनी छुट्टियां नहीं ली, क्योंकि उनके जीवनसाथी या बच्चों को उस वक्त पर छुट्टी नहीं मिल रही होती है.
सर्वेक्षण के अनुसार रोचक बात यह है कि पैसा और छुट्टियों के बीच निर्णय लेने की बात आए तो दिल्लीवासी आर्थिक फायदों को ऊपर रखते हैं. करीब 43 फीसदी दिल्लीवासियों ने काम को ही तवज्जो दी, वहीं बेंगलूर के 23 प्रतिशत लोग और लगभग 13 प्रतिशत मुंबईकर भी ऐसा ही महसूस करते हैं.
करीब 82 प्रतिशत दिल्लीवासी प्रति सप्ताह 40 घंटे से ज्यादा काम करते हैं. इसी तरह 52 प्रतिशत मुंबईकर और 40 फीसदी बेंगलूरवासी भी हफ्ते में 40 घंटे से अधिक काम करते हैं. ‘एक्सपीडिया’ के मार्केटिंग प्रमुख मनमीत अहलूवालिया ने कहा कि हमने पहली बार भारत में छुट्टियों को लेकर यह सर्वेक्षण किया है. नतीजे रोचक तथ्य पेश करते हैं.