एक नयी किताब में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेन्स (आईएसआई) के अधिकारियों को न केवल ऐबटाबाद में रह रहे ओसामा बिन लादेन के ठिकाने की जानकारी थी बल्कि उसने तत्कालीन अलकायदा प्रमुख के सहायक और अब इस आतंकी संगठन के शीर्ष नेता अयमन अल जवाहिरी को पूर्ण सुरक्षा और रहने के लिए सुरक्षित ठिकाने भी मुहैया कराए थे.
किताब ‘सील टॉरगेट जेरोनिमो’ में कहा गया है कि आईएसआई अधिकारी समय समय पर लादेन की जांच भी करते थे. सनसनीखेज खुलासे करने वाली यह किताब सील्स के पूर्व कमांडो चक फैरर ने लिखी है.
दो मई को ऐबटाबाद में अमेरिकी हमले में लादेन के मारे जाने के घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्यौरा देने वाली यह किताब लादेन को मारने वाली सील्स टीम के सदस्यों, अमेरिकी सेना और ओबामा प्रशासन के अधिकारियों के साक्षात्कार और उनसे की गई बातचीत पर आधारित है.
सभी स्रोतों को गोपनीय रखा गया है. अभी तक ओबामा प्रशासन, रक्षा विभाग और सेंट्रल इंटेलिजेन्स एजेन्सी :सीआईए: के अधिकारी यही कहते आए हैं कि उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह पता चलता कि आईएसआई को लादेन के ठिकाने की जानकारी थी या वह लादेन को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा रही थी.
फैरर ने अपनी किताब में लिखा है, ‘आईएसआई अच्छी तरह जानती थी कि लादेन कहां है. वह उसे पूरी तरह समर्थन भी देती रही.’ कुल 225 पृष्ठों की यह किताब न्यूयार्क के सेंट मार्टिन्स प्रेस ने प्रकाशित की है.
लादेन के जीवन के आखिरी कुछ माह का जिक्र करते हुए फैरर ने लिखा है कि वह धीरे धीरे एकांतवासी हो गया था. उसके एक सहायक ने उस पर फिल्म बनाई थी जिसमें वह अलकायदा की वेबसाइट पर रिलीज करने या अलजजीरा पर प्रसारित करने के लिए संदेश को पढ़ने की कोशिश कर रहा था.
फैरर ने लिखा है, ‘ओसामा ने ट्रक बमों के डिजाइन और लंदन, वॉशिंगटन, न्यूयार्क, पेरिस तथा रोम में हमले की योजनाएं जुटाई थीं. उसे जवाहिरी, अल लिब्बी तथा पाकिस्तान की आईएसआई के अधिकारियों द्वारा भेजे गए कूरियर मिलते थे. समय समय पर आईएसआई उसकी जांच करती थी लेकिन ज्यादातर समय उसे अकेले रहने का पूरा अवसर दिया जाता था.’ जवाहिरी को एक होशियार और चतुर व्यक्ति बताते हुए फैरर ने कहा कि तोडा बोडा के बाद वह आईएसआई की सुरक्षा में आ गया.
किताब में लिखा गया है, ‘तोरा बोरा में संकट के बाद जवाहिरी को यह साबित करने की जरूरत पड़ी कि अलकायदा अब भी सक्रिय है जबकि उसके दो अमीर छिपे हुए थे. अमेरिकी ड्रोन हमलों और विशेष अभियानों में अलकायदा के कई प्रमुख नेता मारे गए.’
फैरर की किताब में आगे लिखा है, ‘इस दौरान जवाहिरी अपनी गतिविधियां लगातार संचालित करता रहा. उसे पकड़ने के लिए अमेरिका ने 2.5 करोड़ डालर का इनाम रखा है. जवाहिरी ने किसी पर भरोसा नहीं किया और जल्द ही पाकिस्तान चला गया. राजनीतिक दल जमात ए इस्लामी से संबंध के चलते वह भी आईएसआई की सुरक्षा में आ गया.’
कुछ पृष्ठों के बाद फैरर ने एक बार फिर लिखा है कि जवाहिरी को आईएसआई ने शरण दी. ‘ओसामा की तरह वह भी रडार की निगरानी में रहता था और ईरान की सीमा से लगे बलूचिस्तान के कबायली इलाकों में सुरक्षित ठिकानों में आता जाता रहता था.’