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ग्‍वालियर में हो रही है नशे की पैदावार

इसे भेड़ की खाल में भेड़िया होने का सटीक उदाहरण कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी. पिछले दिनों ग्वालियर में पुलिस की अपराध शाखा के हत्थे कुछ ऐसे किसान चढ़े हैं जो अनाज, फल या सब्जियों की खेती की आड़ में गांजा उगा रहे थे.

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इसे भेड़ की खाल में भेड़िया होने का सटीक उदाहरण कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी. पिछले दिनों ग्वालियर में पुलिस की अपराध शाखा के हत्थे कुछ ऐसे किसान चढ़े हैं जो अनाज, फल या सब्जियों की खेती की आड़ में गांजा उगा रहे थे. अंचल के खेतों में गत दस माह में फसल की आड़ में उगाए गए गांजे के 40,000 से ज्‍यादा पौधे मिल चुके हैं.

सरसों जैसी नगदी फसल के लिए प्रसिद्ध ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की नयी पहचान बन रही है यहां अवैध रूप से हो रही गांजे की खेती. नशे के सौदागरों ने स्थानीय किसानों के साथ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया है जिसका अंदेशा भी होना मुश्किल था.

अपराध शाखा के अधिकारियों को मुखबिरों से मिली इस खबर ने, कि अंचल के किसान साधारण खेती की आड़ में नशे की खेती कर रहे हैं, एकबारगी उन्हें भी चौंका दिया. फिर शुरू हुई ऐसे किसानों की धर-पकड़. नतीजाः पुलिस को दस माह में गांजे की अवैध खेती के डेढ़ दर्जन से ज्‍यादा प्रकरण मिले.

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हाल का, 14 मई का मामला है भिंड जिले के बरसेरिया गांव का. यहां के किसान पुरुषोत्तम कुशवाह के खेत में गांजे के पांच सौ से ज्यादा पौधे मिले हैं. उसने इन पौधों को गेंदे के फूल के पौधों के बीच छिपाया हुआ था.

एक दिन बाद ही डबरा में विष्णु श्रोती नाम के किसान के खेत से गांजे के 100 से ज्‍यादा पौधे मिले, जिसने इन्हें एक ओर ऊंची दीवार बनाकर और दूसरी ओर से गन्ना के पौधे लगाकर छिपा रखा था. गांजे के पौधों के अलावा श्रोती के पास से करीब 25 किलो सूखा गांजा भी बरामद हुआ.

9 मई को शहर से सटे गांव तिघरा में भी अपराध शाखा को पांच हेक्टेयर के खेत में गांजे के पौधे लहलहाते हुए मिले थे. भागीरथ और राजेंद्र कुशवाह नाम के किसानों ने अपने खेतों में फूलों के बीच गांजे के पौधे लगा रखे थे. यहां गांजे के 15,000 हजार पौधे लगे हुए थे, जिनसे चंद महीनों में ही उन्हें तीन क्विंटल गांजा मिलता. इससे पहले शिवपुरी, मुरैना और दतिया के सेओरा गांव में भी अनेक खेतों से बड़ी संख्या में गांजे के पौधे बरामद हुए थे, जिन्हें पुलिस ने मौके पर ही नष्ट कर दिया था.

गत फरवरी माह में मुरैना जिले के कैलारस गांव में हुकमा सिंह के खेत से अफीम के 1,200 और गांजे के 800 पौधे मिले थे. साफ है कि अंचल की उपजाऊ जमीन को नशे के सौदागरों की नजर लग चुकी है. भारी मुनाफे के लालच में फंसे किसान, जो कभी अपनी उपजाऊ जमीन का इस्तेमाल अनाज, फल या फूल उगाने के लिए करते थे, आज यहां नशे के बीज बो रहे हैं.

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दरअसल गांजा के उत्पादन में, किसी भी अन्य फसल की तुलना में किसानों को बहुत मुनाफा होता है. गांजे का एक पौधा, यदि छह महीने से एक वर्ष तक जीवित रह गया तो करीब 10,000-20,000 रु. का लाभ देता है. महज एक किलो गांजा की एवज में किसानों को 3,000 रु. मिलते हैं. यानी अगर किसान खेत में गांजे के सिर्फ सौ पौधे भी लगा लेता है तो सालभर में अच्छी-खासी कमाई कर लेता है. जाहिर है, जब कम मेहनत में ज्‍यादा मुनाफा मिल रहा हो तो सरसों, गेहूं या चने की फसल कोई क्यों लगाएगा.

गांजे की अवैध खेती का भंडाफोड़ करने वाले अपराध शाखा के अतिरिक्त  पुलिस अधीक्षक अमित सांघी बताते हैं कि गांजे के इन 40,000 से ज्‍यादा पौधों से 1,000 क्विंटल से ज्‍यादा गांजे का उत्पादन हो सकता था. बाजार में इसकी कीमत 30 से 40 लाख रु. होती. अब तक की जांच में पता चला है कि ये किसान अपने स्तर पर ही गांजा बेचा करते थे, हालांकि पुलिस गांजा उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने और बाजार में बेचने के पीछे तस्करों के नेटवर्क से भी इनकार नहीं कर रही है. 

मुनाफे का धंधा

अफीम या स्मैक जैसे बेहद महंगे और बमुश्किल हासिल होने वाले नशीले पदार्थों की बनिस्बत गांजा या मारिजुएना न केवल खासा सस्ता होता है बल्कि बड़ी आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है. चिलम, हुक्के या सिगरेट में भरकर इसकी सूखी पत्तियां और फूल नशा करने के काम आते हैं. संसाधित करने पर इन्हीं से हशीश, कीफ और तेल बनता है.

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गांजा का उत्पादन पूरी तरह से अवैध है बावजूद इसके अंचल के खेतों में बड़ी संख्या में गांजे के पौधे पाए गए. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो में विशेष अधिवक्ता जी. एम. सोनी बताते हैं कि नशीले पदार्थ रखने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है. दरअसल गांजे का उत्पादन मोटे मुनाफे का धंधा है.

मसलन, एक हेक्टेयर खेत में लगे 15 क्विंटल सरसों या 30 क्विंटल गेहूं की कीमत बमुश्किल 50,000 रू. होगी, जबकि गांजा लगाने पर यही कमाई लाखों में होगी. गांजे के एक पौधे से, जो कि छह माह में तैयार हो जाता है और जिससे चार से छह किलो गांजा निकाला जा सकता है, करीब 20,000 रु. की कमाई हो जाती है.

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