नरोडा पाटिय़ा दंगा केस में पीड़ित परिवारों को अब दो महीने बाद मिलेगा इंसाफ. अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फैसला पूरे दो महीने बाद यानी 29 अगस्त के लिए टाल दिया है.
आपको बता दें 10 साल पहले 28 फरवरी 2002 को गोधराकांड के बाद भड़के दंगे में 95 लोग जिंदा जला दिए गए थे. इस केस में कुल 62 आरोपी हैं लेकिन 1 आरोपी की मौत हो गई है इसलिए 61 आरोपियों के खिलाप फैसला सुनाया जाएगा.
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ज्योत्सना याज्ञनिक ने पिछले महीने मामले की सुनवाई पूरी की और फैसला 30 जून तक के लिए सुरक्षित रखा. 61 आरोपियों में नरेंद्र मोदी सरकार की पूर्व मंत्री और नरोदा की विधायक माया कोडनानी, पूर्व विहिप नेता बाबू बजरंगी शामिल हैं.
घटना 28 फरवरी, 2002 को गोधरा ट्रेन हादसे के बाद विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित बंद के दौरान हुई. कोडनानी की अगुवाई में घातक हथियारों से लैस भीड़ शहर के नरोदा पाटिया में इकट्ठा हुई और 97 लोगों की हत्या कर दी. गोधरा के बाद सबसे वीभत्स दंगों में एक में 33 अन्य घायल हुए.