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अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने को तैयार है सरकारः सरकार

संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति के मुद्दे पर विपक्ष के हमले का मुकाबला करने की तैयारी कर रही सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह अविश्वास प्रस्ताव सहित किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है.

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पी चिदंबरम
पी चिदंबरम

संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति के मुद्दे पर विपक्ष के हमले का मुकाबला करने की तैयारी कर रही सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह अविश्वास प्रस्ताव सहित किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है.

सरकार ने इसके साथ ही इस सत्र में कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिये राजनीतिक दलों से संपर्क साधना शुरु कर दिया है. सरकार ने मध्यावधि चुनावों की किसी भी संभावना से इंकार करते हुये कहा कि वह 2014 तक का अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी.

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संसद का शीतकालीन सत्र शुरु होने से पहले मीडिया के समक्ष सरकार की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिये तैयार है.

चिदंबरम ने कहा, ‘संसद के शीतकालीन सत्र में विधायी कार्य का बड़ा एजेंडा है. चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के दौरान विधेयकों को पारित कराने के लिये हम राजनीतिक दलों से भी संपर्क साध रहे हैं,’

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उन्होंने इस पर भी गौर किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले दलों के नेताओं से भी मुलाकात की है. वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के सहयोगी दलों से भी मिलेंगे.

महत्वपूर्ण विधेयकों में बीमा संशोधन विधेयक है जिसमें एफडीआई सीमा को मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत करने का प्रावधान होगा. बैंकिंग नियमन संशोधन विधेयक और प्रत्यक्ष कर संहिता जैसे कई महत्वपूर्ण आर्थिक विधेयक पेश किये जायेंगे.

बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति दिये जाने के सरकार के फैसले पर विपक्ष की सरकार को घेरने की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा, ‘यदि वह हमें घेरना चाहते हैं, हमें कोई आपत्ति नहीं है, हम नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिये तैयार हैं. लेकिन यदि संसद नहीं चलने दी जायेगी तो यह संसदीय लोकतंत्र के लिये ठीक नहीं.’

संप्रग सरकार की सहयोगी रही तृणमूल कांग्रेस द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा, ‘सदन में कोई प्रस्ताव लाना हर राजनीतिक दल का अधिकार है. जब भी यह प्रस्ताव आयेगा हम इसका सामना करेंगे.’

वामपंथी दलों ने एफडीआई पर सदन में मतविभाजन के बारे में एक प्रस्ताव रखा है. मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी उसकी सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) और संप्रग सरकार से नाता तोड़कर अलग हुई तृणमूल कांग्रेस ने भी नोटिस दिये हैं.

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सरकार की चिंता बढ़ाते हुये उसकी सहयोगी पार्टी द्रमुक ने भी अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. अविश्वास प्रस्ताव अथवा एफडीआई के मुद्दे पर पार्टी का क्या रुख होगा इसका पता नहीं है.

मध्यावधि चुनाव को लेकर चल रही चर्चा के बारे में मनीष तिवारी ने कहा कि जब से संप्रग-दो सत्ता में आई है, लगातार इस तरह की चर्चा होती रही है. ‘सरकार पांच साल के लिये चुनी गई है, पांच साल के लिये जनादेश मिला है और सरकार पूरे पांच साल चलेगी.’

सरकार को 545 सदस्यों की लोकसभा में द्रमुक के 18 सांसदों सहित वर्तमान में 265 सांसदों का समर्थन प्राप्त है. समाजवादी पार्टी के 22 और बहुजन समाज पार्टी के 21 सांसदों का समर्थन मिलाकर सरकार को समर्थन देने वाले सदस्यों की संख्या 300 से अधिक हो जाती है. यह लोकसभा में 273 की बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है.

 

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