प्रमुख आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने डीजल कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की वकालत करते हुए कहा है कि इससे आखिरकार मुद्रास्फीति कम होगी. मुद्रास्फीति की 5 प्रतिशत से कम की दर को आदर्श स्थिति माना जा सकता है.
उन्होंने कहा, ‘मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि हमें डीजल की कीमत को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना चाहिए जिससे राजकोषीय बोझ थोड़ा कम होगा और इससे दीर्घकाल में मुद्रास्फीति कम होगी.’ पेट्रोल की कीमत जहां बाजार से संबद्ध है वहीं घरेलू गैस, केरोसिन और डीजल की कीमत पर फैसला सरकार करती है. इससे आमतौर पर सब्सिडी का भारी भरकम बजटीय व्यय होता है.
तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को पेट्रोल की कीमत 1.80 रुपये बढ़ाई है. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने स्वीकार किया कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने से मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा. पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने डीजल, घरेलू गैस और केरोसिन की कीमत में संशोधन पर फैसला करने के लिए उच्च अधिकार प्राप्त मंत्रिस्तरीय समिति की बैठक की मांग की क्योंकि इन ईंधनों बिक्री पर कपंनियों को नुकसान हो रहा है.
रसोई गैस और डीजल की कीमत में संशोधन जून में हुआ था. मुद्रास्फीति दहाई अंक के आसपास घूम रही है, ऐसे में आशंका है कि डीजल की कीमत में किसी भी किस्म की बढ़ोतरी से हालात और बिगड़ सकते हैं. सितंबर में सकल मुद्रास्फीति 9.72 फीसदी थी.
प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘हालांकि अपनी जनता को यह बताना जरूरी है कि यदि हम कृत्रिम तरीके से विशाल राजकोषीय घाटे के साथ डीजल पर सब्सिडी देते हैं तो इससे कीमतों पर बढ़ने का दबाव रहेगा.’ बसु प्रधानमंत्री द्वारा मुद्रास्फीति पर बनाई गई समिति के अध्यक्ष भी हैं.
उन्होंने कहा, ‘डीजल की कीमत को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर भारत पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा जिम्मेदार देश बन सकता है. क्योंकि फिर सब्सिडी वाले डीजल की जगह पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के विकल्पों की खपत को प्रोत्साहन मिलेगा.’ मुद्रास्फीति के बारे में उन्होंने कहा कि इसे नीचे लाना प्राथमिकता है. उन्होंने कहा, ‘मैं चाहूंगा कि भारत में मुद्रास्फीति को मजबूती से पांच फीसदी से नीचे लाया जाए.
दरअसल मैं चार फीसद का लक्ष्य चाहूंगा.’ बसु ने हालांकि स्वीकार किया कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुद्रास्फीति को पांच फीसदी तक सीमित रख पाना मुश्मिल होगा. उन्होंने कहा, ‘लेकिन अगले साल (2012) के अंत तक कभी यदि हम पांच फीसदी या इससे कम के स्तर पर पहुंच जाएं तो अच्छा रहेगा.’ केंद्रीय बैंक को उम्मीद हे कि मुद्रास्फीति मार्च के अंत तक गिरकर सात फीसदी तक आ जाएगी. बसु भी इस अनुमान से सहमत हैं.