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प्रेस की आजादी को कुचल देना चाहिएः काटजू

भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता मनमर्जी अधिकार नहीं है और कहा कि अगर मीडिया की कार्यप्रणाली पिछड़ेपन की तरफ ले जाती है और ‘लोगों की जीवन शैली को कमतर’ करती है तो प्रेस की स्वतंत्रता को निश्चित तौर पर ‘कुचल’ दिया जाना चाहिए.

काटजू काटजू

भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता मनमर्जी अधिकार नहीं है और कहा कि अगर मीडिया की कार्यप्रणाली पिछड़ेपन की तरफ ले जाती है और ‘लोगों की जीवन शैली को कमतर’ करती है तो प्रेस की स्वतंत्रता को ‘निश्चित तौर पर’ ‘कुचल’ दिया जाना चाहिए.

अपने निर्भीक और विवादास्पद टिप्पणियों के लिए मशहूर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ने बॉलीवुड और क्रिकेट को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों से ज्यादा तरजीह देने के लिए भी प्रेस की आलोचना की. उन्होंने चैनलों पर ज्योतिष जैसे विषयों के माध्यम से अंधविश्वास और ‘पिछड़े विचारों’ को ‘बढ़ावा’ देने के लिए भी खबरिया चैनलों की आलोचना की.

काटजू ने कहा, ‘प्रेस की स्वतंत्रता मनमर्जी अधिकार नहीं है. पूर्ण अधिकार है लोगों की जिंदगी के स्तर में सुधार करना. अगर प्रेस की स्वतंत्रता से लोगों की जिंदगी का स्तर सुधारने में मदद मिलती है तो यह अच्छी बात है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन अगर प्रेस की स्वतंत्रता से लोगों की जिंदगी का स्तर कम होता है, लोग और गरीब होते हैं तो हमें निश्चित तौर पर प्रेस की स्वतंत्रता को कुचल देना चाहिए.’ काटजू ने कहा, ‘सचिन तेंदुलकर ने सौवां शतक लगाया, अब देश में दूध और शहद की नदियां बहेंगी. क्रिकेट लोगों का अफीम है. लोगों को क्रिकेट का नशा है. रोमन सम्राट कहते थे कि अगर आप लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो उन्हें सर्कस दीजिए.’

पीसीआई के प्रमुख 16 नवम्बर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाने के लिए आयोजित समारोह में बोल रहे थे. समारोह में बी. जी. वर्गीज, इंदर मल्होत्रा, निहाल सिंह और श्रवण गर्ग जैसे कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे. काटजू ने वहां मौजूद लोगों से कहा, ‘मैं बारम्बार आपसे कहता हूं कि आप अपने दिमाग में एक और केवल एक सिद्धांत बिठा लीजिए. प्रत्येक प्रणाली की एक और केवल एक परीक्षा है रहन-सहन का स्तर बढ़े. क्या रोजगार के अवसर हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा बेहतर हो रही हैं या नहीं. इसलिए कृपया मत सोचिए कि प्रेस की स्वतंत्रता मनमर्जी स्वतंत्रता है.’

उन्होंने कहा, ‘पत्रकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग हैं. कृपया आप मत सोचिए कि आप भगवान हैं. और क्या उससे लोगों के जीवन के स्तर में सुधार आता है? यह वैज्ञानिक विचार है और पिछड़े विचारों से लड़ना है.’

चैनलों पर ज्योतिष के शो पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘चैनलों पर ज्योतिष के शो दिखाए जा रहे हैं जो पूरी तरह बकवास हैं. अगर आप लोगों को पिछड़ा रखते हैं तो यह पूरी तरह अंधविश्वास है. क्या आपको इतनी समझ नहीं है?’

काटजू ने कहा, ‘इस तरह की स्वतंत्रता जिससे पिछड़े विचारों को बढ़ावा दिया जाए, लोगों को गरीब रखा जाए तो क्या आप सोचते हैं कि आप भगवान हैं जो भारत के लोगों पर प्रभुत्व कायम रखेंगे. लोग पत्रकारों से श्रेष्ठ हैं. आपको सेवा करनी है. आपको हनुमान की तरह व्यवहार करना है. हनुमान जी ने भगवान राम की सेवा की, आज आम भारतीय भगवान राम है.’

उन्होंने कहा, ‘इस देश में व्यापक गरीबी है, व्यापक स्तर पर बेरोजगारी है. किसान आत्महत्या कर रहे हैं. पांच वर्षों तक आप इसे नहीं छापेंगे. फिर पी. साईनाथ की तरह कोई बड़ा पत्रकार इसे इतना उजागर करेगा कि आप इसे रोक नहीं सकेंगे.’

काटजू ने कहा कि विदर्भ के किसानों द्वारा उत्पादित कपास के बने आभूषणों को पहने मॉडल को सैकड़ों पत्रकारों ने कवर किया जबकि आत्महत्या करने वाले किसानों की खबर केवल स्थानीय मीडियाकर्मियों ने कवर किया. उन्होंने कहा, ‘आपको शर्म नहीं आती? क्या यह आपका जिम्मेदाराना व्यवहार है? और आप किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता की बात करते हैं, भले ही भारत के लोग भाड़ में जाएं.’

उन्होंने कहा, ‘मैं प्रेस की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा समर्थक रहा हूं. प्रेस की स्वतंत्रता के लिए आप में से कोई भी इतना नहीं लड़ा होगा जितना मैं लड़ा हूं.’ काटजू ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई के दौरान कश्मीर में पत्रकार प्रभावित हुए जिसके बाद उन्होंने मामले को राज्य सरकार के समक्ष उठाया.

उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा, ‘क्या आपमें से किसी ने भी प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मुझे धन्यवाद पत्र भेजा?’ उन्होंने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र में भी पत्रकारों की रक्षा और कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के लिए आवाज उठाई.

काटजू ने कहा कि वह जाम्बवंत की भूमिका निभा रहे हैं जिन्होंने भगवान हनुमान को उनकी शक्ति और उनके कर्तव्य की याद दिलाई थी.

काटजू ने कहा कि बॉलीवुड और क्रिकेट की हस्तियां मीडिया में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण दिखती हैं.

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