कश्मीर घाटी में फिर से हिंसा भड़कने के बीच सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रविवार रात वहां के हालात पर चर्चा की.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई सीसीएस की बैठक में राज्य के हालात की समीक्षा की गयी. लगभग तीन सप्ताह में दूसरी बार सीसीएस की बैठक हुई है, जिसमें कश्मीर के हालात पर बातचीत की गयी. घाटी में कुछ दिन पहले हुई पत्थरबाजी की घटनाओं और हिंसा के बाद कुछ शांति कायम होती नजर आ रही थी, लेकिन शुक्रवार को फिर से हिंसा भड़क उठी.
समझा जाता है कि बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा और राज्य सरकार की ओर से दी गयी जानकारी पर चर्चा की गयी. विभिन्न खुफिया एजेंसियों और राजनीतिक दलों की इस संबंध में राय को लेकर भी बातचीत हुई.
सीसीएस ने राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इस प्रस्ताव पर भी संभवत: चर्चा की है कि राज्य में हर समूह और संगठन के साथ आंतरिक बातचीत शुरू की जाए.{mospagebreak}
राज्य सरकार ने उन पूर्व उग्रवादियों के पुनर्वास की नीति बनाने का आग्रह भी किया है, जो अपनी सजा काट चुके हैं और बेरोजगार हैं. खुफिया एजेंसियों की ओर से लगातार जानकारी मिल रही है कि पत्थरबाजी की घटनाओं में अधिकतर वे लोग शामिल हैं, जो पहले उग्रवादी थे लेकिन अब सजा काटने के बाद बेरोजगार हो गये हैं.
सीसीएस की बैठक में गृह मंत्री पी चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए के एंटनी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
इस बीच शुक्रवार से घाटी में भड़की हिंसा में अब तक नौ लोग मारे जा चुके हैं. हिंसा प्रभावित कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगा दिया गया है और वहां के हालात तनावपूर्ण हैं.
इससे पहले सीसीएस ने सात जुलाई को बैठक कर कश्मीर के हालात पर चर्चा की थी. उस समय तय किया गया था कि उन तत्वों से सख्ती से निपटा जाए, जिनकी वजह से घाटी के हालात खराब हुए हैं.