देश में हर तरफ 72वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियां हो रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल लाल किले से तिरंगा फहराएंगे. उनकी तरह ही देश और दुनिया में कई जगहों पर तिरंगा फहराया जाएगा.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश और दुनिया में फहराया जाने वाला तिरंगा कौन बनाता है? क्या आप जानते हैं कि एक तिरंगा कैसे तैयार होता है? इन सभी प्रश्नों का एक सिर्फ एक ही उत्तर है. कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS फेडरेशन).
कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS फेडरेशन) ही वो एकमात्र इकाई है, जो देश और दुनिया में अधिकृत तौर पर फहराए जाने वाले तिरंगे तैयार करती है. संघ के सचिव शिवानंद ने Aajtak.in से बातचीत में बताया कि KKGSS खादी व विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड देश की अकेली ऑथराइज्ड नेशनल फ्लैग मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट है. यह यूनिट कर्नाटक के हुबली शहर में है.
इस संघ की स्थापना वैसे तो 1957 में हुई थी, लेकिन खादी बनाना इसने 1982 से शुरू किया. शिवानंद बताते हैं कि हर साल यह यूनिट हजारों तिरंगे बनाती है. उन्होंने जानकारी दी कि इस साल अभी तक यूनिट ने 25 हजार से ज्यादा तिरंगे बना लिए हैं. शिवानंद बताते हैं, ''पिछले साल हमने 2.5 करोड़ रुपये कमाए थे. इस बार हमें उम्मीद है कि हम 3 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएंगे.''
फेडरेशन को 2005-06 में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला. तब से इसने तिरंगा तैयार करने का काम शुरू किया. बीआईएस ही यहां तैयार होने वाले तिरंगे की क्वालिटी चेक करता है. शिवानंद बताते हैं कि करीब 18 तरह के क्वालिटी चेक होते हैं. एक छोटा सा भी डिफेक्ट होने पर रिजेक्ट कर दिया जाता है.
हर साल 350 से ज्यादा लोग देश और विदेश में फहराने के लिए तिरंगा तैयार करते हैं. शिवानंद के मुताबिक इन 350 लोगों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. तिरंगे के अलावा यह यूनिट खादी की अन्य चीजें भी तैयारी करती है.
ऐसे तैयार होता है तिरंगा
तिरंगे को तैयार करने की एक लंबी प्रक्रिया है. सबसे पहले फेडरेशन की बागलकोट यूनिट में हाई क्वालिटी के कच्चे कॉटन से धागा बनाया जाता है. इसके बाद गाडनकेरी, बेलॉरू, तुलसीगिरी में कपड़ा तैयार होता है. कपड़ा तैयार होने के बाद हुबली यूनिट में डाई और अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं. शिवानंद बताते हैं कि तिरंगा बनाने के लिए सिर्फ कॉटन और खादी का इस्तेमाल होता है. सभी जरूरी क्वालिटी चेक पास करने के बाद ही तिरंगे को यूनिट से बाहर भेजा जाता है.
बरतनी पड़ती है काफी ज्यादा सावधानी:
शिवानंद बताते हैं कि तिरंगा तैयार करते वक्त काफी ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है. बीआईएस और केवीआईसी द्वारा निर्धारित रंगों में ही इसे तैयार करना पड़ता है. कौन सा रंग कितने अनुपात में हो, यह सब तय होता है.
तिरंगे पर अशोक चक्र के आकार और अन्य मानक को लेकर भी नियम तय हैं. इसे भी इन नियमों के हिसाब से ही बनाना होता है. इस तरह तिरंगे को बनाते वक्त आकार, लंबाई, चौड़ाई और अन्य सभी तय मानकों का ध्यान रखना पड़ता है. ताकि किसी भी तरह की गलती न हो.