पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट पर 35 जहाज़ इस इंतज़ार में हैं कि उन्हें बंदरगाह तक आने का रास्ता मिले, तो वो माल उतारें. चीनी, तेल और सीमेंट लदे इन जहाज़ों से माल मंगवाने वाले व्यापारियों को रोज़ लाखों रुपये की चपत लग रही है और रोज़ बढ़ती जा रही है जहाज़ पर लदे माल की कीमत.
15-20 दिन समंदर में भटकना पड़ रहा है जहाजों को
पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह के पास ऐसे एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 35 जहाज़ खड़े हैं. बंदरगाह का किनारा छिछला हो चुका है. समंदर की रेत हटाकर किनारों को गहरा करने का काम इतना सुस्त है कि बंदरगाह तक पहुंचने के लिए जहाज़ों को 15-20 दिन यूं ही समंदर में भटकना पड़ रहा है. हल्दिया पोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि बंदरगाह पर जहाज़ों के आने का रास्ता बनाने वाले ड्रेजर नाकाफी हैं.
35 में से 24 जहाज़ों पर लदा है लोहा
फिलहाल हल्दिया पोर्ट पर जो 35 जहाज़ फंसे पड़े हैं, उनमे 24 जहाज़ों पर लोहा लदा है, जबकि चार जहाज़ों पर कच्चा तेल, एक जहाज़ पर चीनी, एक जहाज़ पर सीमेंट और एक जहाज़ पर केमिकल लदा है.
बंदरगाह पर जहाज़ों के पहुंचने में एक दिन की देरी भी माल मंगाने वाले व्यापारियों को बहुत महंगी पड़ रही है. उन्हें एक दिन के लिए जहाज़ कंपनी को 10 हज़ार डॉलर किराया चुकाना पड़ता है. इससे बाज़ार में आने से पहले ही माल की कीमत बढ़ जाती है