चक्रवात पिलिन जब 12 अक्तूबर की रात ओडिशा में गोपालपुर तट के पास पहुंचा था, उस दौरान गंजाम जिले के इस शहर में कम से कम 27 शिशुओं का जन्म हुआ.
बरहामपुर शहर के विभिन्न अस्पतालों के कर्मियों ने नवजात शिशुओं की माताओं को अपने बच्चों का नाम पिलिन रखने का सुझाव दिया है. शहर के तीन प्रमुख अस्पतालों एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (7), क्रिश्चियन अस्पताल (17) और सिटी अस्पताल (3) में 27 बच्चे पैदा हुए. उन्होंने इलाके में उस अवधि के दौरान और बच्चों के जन्म लेने की संभावना से इंकार नहीं किया.
क्रिश्चियन अस्पताल के निदेशक एनके नंदा ने कहा कि हमने शिशुओं के अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों के नाम फैलिन रखें क्योंकि उनका जन्म उस विनाशकारी चक्रवाती तूफान के दौरान हुआ था. उस अफरातफरी के माहौल में इस अस्पताल में पैदा 17 बच्चों में 6 लड़कियां हैं. नंदा ने कहा कि अस्पताल में पैदा हुए सभी बच्चे और उनकी मां ठीक हैं.
ललिता बरीक नामक एक महिला ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया है. उसे भी अस्पताल के कर्मियों ने अपनी बेटी का नाम पिलिन रखने की सलाह दी है. उनकी बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है, क्योंकि वह पीलिया से पीड़ित है. एक नर्स ने बताया कि बच्ची की हालत ठीक है और उसका ख्याल रखा जा रहा है.
ललिता ने कहा, 'इसके पहले मेरे चार बच्चों की मौत हो चुकी है. अगर इस बार यह बच गई तो मैं निश्चित रूप से इसका नाम पिलिन रखूंगी.' रांभा की एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्य से दोनों की मौत हो गई. इसी प्रकार एक महिला ने चक्रवात आश्रय केंद्र में एक बच्चे को जन्म दिया है. महिला के रिश्तेदारों ने उसे सलाह दी है कि बच्चे का नाम तूफान रखा जाए.