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154 पूर्व जजों-अफसरों की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी, CAA पर हिंसा करने वालों पर हो कार्रवाई

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा देखने को मिली थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था.

सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- PTI) सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- PTI)

  • कहा- CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक तत्वों ने हिंसा को उकसाया
  • उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान देखने को मिली थी हिंसा
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच देश के 154 पूर्व जजों और अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी है. पूर्व जज और अधिकारियों ने CAA के खिलाफ प्रदर्शन के नाम पर हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है. इन 154 दिग्गजों में पूर्व न्यायाधीश, सिविल सेवा से जुड़े अधिकारी और रक्षा अधिकारी समेत अन्य शामिल हैं.

इन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करने के लिए ऐसे उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है. इन 154 दिग्गजों के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई पूर्व जज और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के पूर्व चेयरमैन प्रमोद कोहली कर रहे हैं. प्रमोद कोहली ने आरोप लगाया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन को राजनीतिक तत्वों ने हिंसा के लिए उकसाया.

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उन्होंने कहा कि जब नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ प्रदर्शन किए गए, तो इनके समर्थन में भी आवाज सामने आई. उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा. प्रदर्शनकारियों ने वाहनों को आग के हवाले कर दिया था और सुरक्षा बलों पर पथराव किया था.

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इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों की मौत भी हुई थी. इसके अलावा हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई पुलिस कर्मियों को भी चोटे आई थीं. इसके बाद प्रशासन ने कई प्रदर्शनकारियों की पहचान की और उनको नोटिस भेजा है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक रूप से साफ कह चुके हैं कि हिंसा करने वालों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा. उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

पश्चिम बंगाल में रेलवे की बोगियों में भी आगजनी की गई थी, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने रेलवे की संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजा था. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में धारा-144 के उल्लंघन करने पर 1200 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं.

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