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राजस्थान सरकार 349 करोड़ खर्च कर 765 लोगों को ही दिला पाई नौकरी

राजस्थान में पिछले चार साल में चार लाख बेरोजगार रोजगार विभाग पहुंचे, लेकिन विभाग ने 349 करोड़ रुपये खर्च करके सिर्फ 765 लोगों को नौकरी दिला पाया.

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

राजस्थान में 16 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा करके सत्ता में आई वसुंधरा राजे सरकार के रोजगार विभाग की हालत दिनोंदिन खस्ता होती चली जा रही है. आलम यह है कि सूबे के रोजगार विभाग की हालत भी बेरोजगारों की तरह हो गई है

पिछले चार साल में चार लाख बेरोजगार रोजगार विभाग पहुंचे, लेकिन विभाग 349 करोड़ रुपये खर्च करके सिर्फ 765 लोगों को नौकरी दिला पाया. इतना ही नहीं, रोजगार विभाग इस साल जुलाई तक एक भी व्यक्ति को नौकरी नहीं दिला पाया. वहीं, मामले में अधिकारियों की दलील है कि वैकेंसी नहीं आती हैं, तो नौकरी कहां से दिलवाई जाए.

इस संबंध में राजस्थान के रोजगार मंत्री जसवंत यादव का कहना है कि सरकार के पास निजी नौकरी नहीं हैं. निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाए जाएंगे. हालांकि जब उनसे यह सवाल किया गया कि आखिर कैसे रोजगार उपलब्ध होंगे, तो वह बिना जवाब दिए चलते बने.

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रोजगार विभाग की कुर्सियों में जम गई धूल की परत

राजस्थान के रोजगार विभाग के जयपुर समेत अन्य जिलों के दफ्तरों में न कोई कर्मचारी मौजूद होता है और न ही कोई अधिकारी. इन दफ्तरों में खाली पड़ी कुर्सियों और टेबलों में धूल की मोटी परत तक जम गई है. अधिकारी इधर-उधर घूमते नजर आते हैं. हालांकि इस विभाग का काम बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करना है, लेकिन अगर पिछले चार साल के बीजेपी सरकार के आंकड़ों पर गौर करें, तो चार साल में करीब चार लाख बेरोजगार नौकरी के लिए रोजगार विभाग के दफ्तरों में रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. मगर विभाग पूरे सूबे में सिर्फ 765 लोगों को ही नौकरी दिला पाया है.

सूबे के 16 जिलों में एक भी व्यक्ति को नहीं दिलवा पाया रोजगार

राज्य के 16 जिले तो ऐसे हैं, जहां रोजगार विभाग पिछले चार साल में एक भी व्यक्ति को रोजगार नहीं दिलवा पाया है. इस बीच बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन करनेवाले बेरोजगारों की संख्या में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है. राज्य में सरकार बेरोजगारों को 650 रुपये बेरोजगारी भत्ता 30 साल से कम उम्र के बेरोजगार को दो साल के लिए देती है.

आयोजनों में उड़ाए 349 करोड़ रुपये

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इस साल यानी 2017 में जुलाई तक पूरे प्रदेश में रोजगार विभाग एक भी नौकरी नहीं दिलवा पाया है, जबकि पिछले चार सालों में विभाग ने वेतन-भत्ते और आयोजनों पर 349 करोड़ रुपये खर्च किए. इस बाबत जयपुर के रोजगार विभाग के उपनिदेशक का कहना है कि सरकारी नौकरी तो अब आती नहीं. मगर प्राइवेट नौकरियों के लिए अब तक चार रोजगार मेले आयोजित किए जा चुके हैं. रोजगार देने के लिए कहा गया था, मगर अब तक नहीं दिया. हम उनको दोबारा याद दिला रहे हैं. रोजगार विभाग के उपनिदेशक रमेश शर्मा कहते हैं कि सरकारी नौकरी यहां से अब मिलती नहीं और प्राइवेट नौकरी के लिए रोजगार देने वालों को बुलाते हैं. मगर कोई सुनता नहीं है.

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