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सिब्बल का वार- राज्यपाल ने संविधान की शपथ ली या फिर BJP के हितों को बचाने की?

राजस्थान में मुख्यमंत्री बनाम राज्यपाल के बीच तकरार बढ़ती जा रही है. कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद भी राज्यपाल ने अभी तक विधानसभा सत्र नहीं बुलाया है, जिसकी वजह से कांग्रेस आगबबूला है.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल

  • राजस्थान मामले में जारी है तकरार
  • कांग्रेस के निशाने पर राज्यपाल कलराज मिश्र
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच राज्यपाल कलराज मिश्र पर सवाल उठाए हैं. कपिल सिब्बल ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा कि क्या कलराज मिश्र ने संविधान की शपथ ली है या फिर भारतीय जनता पार्टी के हितों की शपथ ली है. गौरतलब है कि विधानसभा सत्र ना बुलाने को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार राज्यपाल पर सवाल खड़े कर रही है.

कपिल सिब्बल ने सवाल किया कि क्या राजस्थान की हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के द्वारा तय नियमों का पालन नहीं करेगी? क्या कोई दूसरा कानून है जिसका पालन हो रहा है?

आपको बता दें कि कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने राज्यपाल कलराज मिश्र को चिट्ठी भी लिखी है. चिट्ठी लिखने वाले कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, अश्विनी कुमार देश के कानून मंत्री भी रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर विधानसभा सत्र नहीं बुलाया जाता है तो फिर राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है. गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ने अदालत में राजस्थान विधानसभा स्पीकर की ओर से पक्ष भी रखा था.

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दरअसल, कांग्रेस सरकार की ओर से राज्यपाल कलराज मिश्र को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए कहा गया है. हालांकि, राज्यपाल ने कोरोना वायरस संकट, साथ ही चिट्ठी में स्पष्टता ना होने की बात कही है. इसके अलावा अब विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 21 दिनों के नोटिस की बात सामने आई है. यही कारण है कि कांग्रेस की ओर से लगातार कलराज मिश्र को निशाने पर लिया जा रहा है.

कांग्रेस की सोच है कि वो जल्द से जल्द विधानसभा में बहुमत साबित कर दे या किसी बहाने सत्र बुलाने कर सचिन पायलट गुट को अयोग्य करार करवाए. ऐसे में कांग्रेस इस ओर जुटी हुई है, हालांकि अभी तक उसे इस मामले में सफलता नहीं मिली है.

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सत्र बुलाने के लिए कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में धरना भी दिया था, इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं. पहले कांग्रेस की ओर से राजभवन के घेराव की धमकी दी गई थी, लेकिन उससे पैदा होने वाले संवैधानिक संकट के डर से कांग्रेस ने इस फैसले को वापस लिया.

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