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अमृतसर: अस्पताल का सफाई कर्मचारी लिख रहा था दिमागी मरीजों को दवाइयां!

सफाई कर्मचारी के डॉक्टर बनने का राज शनिवार को उस वक्त खुला जब गुरु नानक देव मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर सुजाता शर्मा अचानक अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आईं. उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति ओपीडी के बाहर हाथ में मरीजों की पर्चियां लिए बैठा है. उन्होंने उसे तुरंत अपना परिचय देने को कहा तो वह सन्न रह गया.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार के सहरसा अस्पताल में बीते मार्च के महीने में एक सफाई कर्मचारी द्वारा घायल महिला के ऑपरेशन करने की खबर सामने आई थी. इसी से मिलता जुलता मामला अमृतसर से आया है. अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल का सफाई कर्मचारी डॉक्टर बनकर दिमागी बीमारियों से पीड़ित रोगियों को दवाई लिख कर इलाज के नाम पर ठग रहा था.

सफाई कर्मचारी के डॉक्टर बनने का राज शनिवार को उस वक्त खुला जब गुरु नानक देव मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर सुजाता शर्मा अचानक अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आईं. उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति ओपीडी के बाहर हाथ में मरीजों की पर्चियां लिए बैठा है. उन्होंने उसे तुरंत अपना परिचय देने को कहा तो वह सन्न रह गया.

डॉक्टर सुजाता शर्मा ने ओपीडी में बैठे डॉक्टर से जब उस व्यक्ति के बारे में पूछा तो वह भी उसे नहीं पहचान पाए. उसके बाद दूसरे डॉक्टरों से पूछताछ की गई लेकिन किसी ने भी उसे नहीं पहचाना. जब अस्पताल के दूसरे कर्मचारियों ने उसे पहचाना तो सबके होश फाख्ता हो गए. मरीजों को उल्लू बना रहा वह 45 वर्षीय सफाई कर्मचारी अशोक कुमार साबी था. सफाई कर्मचारी अशोक साबी की जब तलाशी ली गई तो उससे मरीजों की दर्जनों पर्चियां और यहां तक कि मेडिकल सर्टिफिकेट भी बरामद हुए.

सुजाता शर्मा ने मामले की गंभीरता देखते हुए तुरंत जांच बैठाई और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए. इस मामले की जांच गुरु नानक देव मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुरेंद्र पाल ने की. जांच में पाया गया कि आरोपी सफाई कर्मचारी पिछले 15 सालों से न्यूरोलॉजी विभाग में कार्यरत है और उसने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की है.

उसके पढ़े लिखे होने के कारण अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार उसे ओपीडी में मरीजों का पंजीकरण करने और उनको सही डॉक्टर के पास भेजने का काम भी दिया जाता था. उसने अस्पताल प्रबंधन की इस गलती का फायदा उठाते हुए अस्पताल के बाहर दवाइयां बेचने वाली दुकानों से दोस्ती कर ली और वह अक्सर मरीजों को डॉक्टर उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर चुपचाप कुछ दवाइयों के नाम लिख देता था. दवाइयों के नाम कुछ इस तरह से लिखे जाते थे कि देखने वाले को मालूम ना हो कि यह दवाई सफाई कर्मचारी ने लिखी है या फिर डॉक्टर ने.

जांच में पाया गया है कि अशोक कुमार मरीजों को दिमागी बीमारियों की दवाइयां लिखकर मोटा पैसा कमा रहा था. हालांकि फिलहाल अभी यह मालूम नहीं हो पाया है कि उसने अब तक कुल कितना पैसा कमाया है, लेकिन इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है. सूत्रों के मुताबिक अमृतसर के इस अस्पताल के आस-पास फर्जी डॉक्टर्स का बड़ा नेटवर्क काम करता है जो विशेषज्ञों के नाम पर मनमर्जी की दवाइयां लिखकर मरीजों का शोषण कर रहा हैं.

इस बारे में जब गुरु नानक देव अस्पताल व कॉलेज के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर सुरेंद्र पाल से बात की गई तो उन्होंने आजतक को बताया कि आरोपी सफाई कर्मचारी ने अपना अपराध कबूल लिया है और वह पूरी जांच की रिपोर्ट सोमवार को मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल को सौंप देंगे. इस शातिर सफाई कर्मचारी के खिलाफ करवाई की जा रही है.

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