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पंजाब: 1 कर्ज ने छीन लीं 3 पीढ़ियां, दादा-पिता के बाद बेटे ने भी दी जान

मृतक लवप्रीत सिंह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी से हैं जिसने कर्ज तले दबकर आत्महत्या की है. बरनाला के भटोला गांव के इस परिवार से पिछली 3 पीढ़ियों में 5 लोग कर्ज की वजह से अपनी जान ले चुके हैं.

मृतक लवप्रीत सिंह का परिवार (फाइल फोटो- राजेश कुमार) मृतक लवप्रीत सिंह का परिवार (फाइल फोटो- राजेश कुमार)

पंजाब में किसानों की कर्जमाफी की योजना चला रही कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को बड़ा झटका लगा है. एक ओर सरकार कर्जमाफी के बड़े-बड़े वादे कर रही है वहीं दूसरी ओर राज्य के 22 वर्षीय एक युवक ने कर्ज के बोझ तले आत्महत्या कर ली. घटना बरनाला की है जहां लवप्रीत सिंह सिंह कर्ज न चुका पाने की वजह से अपनी जान दे दी. यह कर्ज मृतक के परदादा ने 40 साल पहले लिया था जो खुद भी खुदकुशी कर चुके हैं.

मृतक लवप्रीत सिंह अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी से हैं जिसने कर्ज तले दबकर आत्महत्या की है. बरनाला के भटोला गांव के इस परिवार से पिछली 3 पीढ़ियों में 5 लोग कर्ज की वजह से अपनी जान ले चुके हैं. पिछली पांच पीढ़ियों से कर्ज की राशि बढ़कर 8.57 लाख पहुंच चुकी है जिसे अब तक यह परिवार नहीं चुका पाया है. अब इस परिवार में सिर्फ महिलाएं ही रह गई हैं.

परदादा- दादा ने की खुदकुशी

पंजाब सरकार के मुताबिक किसानों का 5 लाख तक का कर्ज माफ किए जाने की योजना राज्य में चलाई जा रही है लेकिन इस परिवार का योजना से सिर्फ 57 हजार का कर्ज ही माफ हो पाया है. परिवार ने 6 लाख रुपये साहूकार से लिए थे जबकि 2 लाख रुपये बैंक का कर्ज है.

बरनाला के इस परिवार में पहली आत्महत्या 40 साल पहले लवप्रीत के परदादा जोगिंदर सिंह ने की थी. मृतक के दादा भगवान सिंह भी कर्ज की वजह से 25 साल पहले आत्महत्या कर चुके हैं. साल 2018 में इसी कर्ज को न चुका पाने की वजह से लवप्रीत के पिता कुलवंत सिंह ने खुदकुशी कर ली थी. इसके अलावा परिवार में मृतक लवप्रीत के परदादा के भाई भी कर्ज की वजह से अपनी जान दे चुके हैं.   

सरकार की योजना पर सवाल

पंजाब सरकार की कर्जमाफी योजना राज्य में किसानों की खुदकुशी रोकने में विफल रही है. सरकार की योजना लागू होने के बाद से राज्य में 60 से ज्यादा किसान कर्ज की वजह से अपनी जान दे चुके हैं. विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है.

अकाली दल के नेता सतनाम सिंह ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावों के समय किसानों से कर्ज माफी का वादा किया था और कहा था कि सरकार बनते ही किसानों का आढ़तियों, कॉपरेटिव सोसायटी, बैंकों आदि का सारा कर्ज माफ किया जाएगा जिसके बाद किसानों ने बैंकों के किश्त भरनी बंद कर दी और कर्ज पर ब्याज बढ़ता चला गया जिस कारण आज किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं.

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