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पंजाब: 51 दिनों में 48,684 जगह पराली जलाने के मामले दर्ज, 12% इजाफा

पंजाब में भले ही सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पराली जलाने को लेकर सख्ती हो रही हो लेकिन इसके बावजूद अगर पिछले की तुलना में इस साल 2019 के अंत तक मामलों पर नजर डाली जाए तो पराली जलाने के मामलों में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

पराली जलाने की समस्या बढ़ती जा रही है (फाइल फोटो- PTI) पराली जलाने की समस्या बढ़ती जा रही है (फाइल फोटो- PTI)

  • पिछले साल के मुकाबले बढ़ी पराली जलाने की समस्या
  • इस साल 51 दिनों के दौरान 48,684 जगह पराली जलाने के मामले

पंजाब में भले ही सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पराली जलाने को लेकर सख्ती हो रही हो लेकिन इसके बावजूद अगर पिछले साल 2018 की तुलना में इस साल 2019 के अंत तक मामलों पर नजर डाली जाए तो पराली जलाने के मामलों में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

पिछले साल जहां 23 सितंबर से 12 नवंबर तक 43,339 पराली जलाने के मामले सामने आए थे. वहीं इस साल 2019 में इन 51 दिनों के दौरान 48,684 जगह पराली जलाने के मामले रिपोर्ट किए गए हैं.

अगर पिछले 24 घंटों की बात की जाए तो सिर्फ मंगलवार को ही संगरूर में 113, बठिंडा में 69, बरनाला में 97, लुधियाना में 42, मानसा में 54, पटियाला में 70 और मोगा में 27 जगह पराली जलाने के मामले सामने आए हैं जबकि अन्य जिलों में भी पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं.

सिर्फ पिछले 24 घंटे में ही राज्य में 145 किसानों पर पराली जलाने को लेकर केस भी दर्ज किया गया है. साल 2018 की तुलना में 2019 में अब तक पंजाब के फाजिल्का को छोड़कर हर जिले में पराली जलाने के मामलों का आकड़ा इस साल की तुलना में बढ़ा ही है.

हालात ऐसे हो गए हैं कि पंजाब के प्रमुख शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स भी खतरनाक स्तर पर पहुंचा हुआ है. बठिंडा 359, पटियाला 313, मंडी गोविंदगढ़ 251, खन्ना 246 तक प्रदूषण का AQI पहुंचा हुआ है.

हालांकि, पंजाब सरकार ने किसानों पर थोड़ी सख्ती करने की बात कही है लेकिन किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक पराली से निपटने के लिए किसानों को संसाधन और आर्थिक मदद मुहैया नहीं करवाई जाती तब तक वो पराली का कोई ठोस समाधान नहीं कर सकते हैं.

अधिकारी बने बंधक

पंजाब के भवानीगढ़ के घराचों गांव में किसानों ने पराली जलाने पर कार्रवाई करने आए दो अधिकारियों को बंधक बना लिया जिसके बाद पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद दोनों अधिकारियों को छुड़वाया.

पंजाब के मानसा में भी किसानों ने अपने साथी किसानों पर पराली जलाने की वजह से दर्ज किए गए मामलों के विरोध में मानसा डीसी दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि जब तक पराली जलाने को लेकर किसानों पर दर्ज किए गए मामले वापस नहीं लिए जाते तब तक वो ऐसे ही प्रदर्शन करते रहेंगे.

पंजाब सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पराली जलाने वाले किसानों पर सरकार की ओर से सख्ती की जा रही है लेकिन कई ऐसे छोटे किसान हैं जिनके पास राज्य सरकार की सब्सिडी के बावजूद भी पराली का प्रबंधन करने वाली मशीनें खरीदने के लिए पैसा नहीं है और वो किसान मजबूरी में पराली को आग लगा देते हैं.

पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने एक बार फिर से गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी और कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसानों को आर्थिक मदद मुहैया करवाने के लिए पंजाब सरकार को फंड नहीं देती तब तक वो पराली का समाधान किसानों से पूरी तरह से नहीं करवा सकते हैं.

साधु सिंह ने कहा कि जो किसान पराली जलाने की जिद पर अड़े हैं और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को बंधक बना रहे हैं और धरने प्रदर्शन कर रहे हैं, उन किसानों को भी सरकार समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश में लगी है.

इस साल जिन इलाकों में पराली जलाने के ज्यादा मामले सामने आए हैं, उन इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि आखिरकार क्यों वहां पर किसान पराली जलाने की जिद पर अड़े हैं और उसी हिसाब से इन इलाकों में पराली का समाधान करने के लिए राज्य सरकार कोशिश करेगी.

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