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पंजाब: IRS अधिकारी ने पेश की मिसाल! पेड़-पौधों के लिए शुरू की एंबुलेंस सेवा

रोहित मेहरा ने बताया कि अभी वे 7-8 फुट ऊंचे पेड़-पौधों को ही रिप्लांट कर पाते हैं. बड़े पेड़ों के लिए ऐसा करने के अभी उनके पास इंतजाम नहीं है. अमृतसर के मजीठा रोड पर रहने वाले 43 साल के रोहित मेहरा की मानें तो 32 किस्म के पेड़ों के लिए सेवाएं दी जा रही हैं.

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अमृतसर में एक IRS अधिकारी ने पेड़-पौधों के लिए अस्पताल व एंबुलेंस सेवा शुरू की है. (फोटो-आजतक)
अमृतसर में एक IRS अधिकारी ने पेड़-पौधों के लिए अस्पताल व एंबुलेंस सेवा शुरू की है. (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सूचना दिए जाने पर पेड़- पौधों का मुफ्त इलाज
  • IRS अधिकारी ने शुरू की सेवा
  • पेड़-पौधों को देते हैं जीवन दान

प्रकृति ने हमारी तरह ही पेड़-पौधों में भी जान डाली है. इंसान या घरों के पालतू जानवर बीमार होते हैं तो उनके लिए डॉक्टर-अस्पताल होते हैं. लेकिन अगर कोई पेड़-पौधे बीमार हो जाएं तो उनके लिए क्या? इसी सोच ने भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रोहित मेहरा को ट्री-एम्बुलेंस और हॉस्पिटल शुरू करने की प्रेरणा दी.  

अपनी तरह की ये अनोखी पहल हाल ही में पंजाब के अमृतसर में हुई है. अगर किसी पेड़ के बीमार (मुरझाने) होने की सूचना हेल्पलाइन नंबर (8968339411) पर मिलती है तो पहले वॉट्सऐप के जरिए उसकी फोटो मंगाई जाती है, फिर एम्बुलेंस के जरिए पहुंच कर उसका मुआयना किया जाता है और फिर पेड़ का उचित इलाज किया जाता है. 

यह भी देखा जाता है कि अगर पेड़-पौधा जिस जमीन पर खड़ा है वो उसके लिए सही नहीं है तो पुनर्वास का भी इंतजाम किया जाता है. ऐसा भी होता है कि कई बार दीवारों या अन्य जगहों पर भी पेड़-पौधे खुद उग आते हैं. उन्हें भी वहां से हटा कर नई जगह पर जीवनदान दिया जाता है. ऐसे पेड़-पौधों के लिए बेहतर खाद-पानी का इंतजाम किया जाता है.

रोहित मेहरा ने बताया कि अभी वे 7-8 फुट ऊंचे पेड़-पौधों को ही रिप्लांट कर पाते हैं. बड़े पेड़ों के लिए ऐसा करने के अभी उनके पास इंतजाम नहीं है. अमृतसर के मजीठा रोड पर रहने वाले 43 साल के रोहित मेहरा की मानें तो 32 किस्म के बेजुबान पेड़ों के लिए सेवाएं दी जा रही हैं. इसके लिए कोई पैसा चार्ज नहीं किया जाता. मेहरा के मुताबिक पेड़ों के कल्याण के लिए वे चाहते हैं कि और लोग भी आगे आएं.

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पत्नी की मां के नाम पर शुरू की सेवा

मेहरा ने ‘पुष्पा ट्री एंड प्लांट हॉस्पिटल एंड डिस्पेंसरी’ के नाम से ये शुरुआत की है. मेहरा ने बताया कि उनकी पत्नी की मां को पेड़-पौधों से बहुत लगाव था, इसलिए उन्हीं के नाम पर यह काम शुरू किया गया है. पेड़ों की सेवा के इस काम में कई वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) विशेषज्ञ भी शामिल हैं. मेहरा के मुताबिक उन्होंने बॉटनी की पढ़ाई नहीं की लेकिन उनके साथ जुड़े 12 लोगों की टीम में 7 ऐसे हैं जिन्होंने बॉटनी की पढ़ाई की है.  

रोहित मेहरा ने कहा, ‘कई लोगों के घरों में पीपल का पौधा निकल आता है, अगर उसे हटाना है तो उसे बिना खराब किए हमारी ओर से रिप्लांट किया जाएगा. इसके अलावा कई पेड़ों में फल नहीं आते तो उसका भी हमारे ट्री एंबुलेंस एंड हॉस्पिटल की ओर से समाधान करने की कोशिश की जाएगी. कई पेड़ों में दीमक लग जाती है या इंसानों की ओर से उनमें कील ठोक दिए जाते हैं तो उनको भी दुरूस्त किया जाएगा.”  

ट्री एम्बुलेंस में गैंती, फावड़ा, गड्ढा खोदने की मशीन, कटर, कैंची, आरी, पानी की टंकी, खाद की बोरी, दवा डालने की मशीन जैसे इंतजाम देखे जा सकते हैं. मेहरा के मुताबिक कई बार हेल्पलाइन के जरिए अजीब मदद भी मांगी जाती है. वो बताते हैं कि एक शख्स ने उन्हें फोन किया कि उसका भाई के साथ बंटवारा हो गया है और घर में खड़े आम के पेड़ का बड़ा हिस्सा भाई की तरफ चला गया है, जिसे वो चाहता है कि उसके हिस्से में कर दिया जाए.

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