SYL मुद्दे को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच
तलवारें लगातार खिंचती जा रही है. एसवाईएल को लेकर
पंजाब कैबिनेट की एक बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में
हुई, इस बैठक में एसवाईएल के निर्माण के लिए किसानों
से अधिग्रहण की गई जमीन को किसानों को वापिस देने
के फैसले पर मुहर लगा दी गई.
पंजाब सरकार ने किसानों के जमीन अधिग्रहण को लेकर पुराने नोटिफिकेशन को भी डि-नोटिफाई किया. पंजाब कैबिनेट ने तुरंत प्रभाव से एसवाईएल के निर्माण के लिए पिछली सरकारों के वक्त किसानों से अधिग्रहण की गई जमीन को वापस देने का फैसला पास किया.
सूत्रों के हवाले से कल होने वाले पंजाब विधानसभा के
स्पेशल सत्र में सरकार 'ऑल वॉटर एग्रीमेंट टर्मिनेशन
एक्ट' पास कर सकती है जिसके बाद पंजाब से तमाम
दूसरे राज्य को दिए जाने वाले पानी के पेंडिंग और चल
रहे एग्रीमेंट रद्द हो सकते हैं. फिलहाल पंजाब सरकार का
कोई भी मंत्री इस पर अभी खुलकर कुछ भी नहीं कह
रहा है पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और
कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि विधानसभा
सत्र में क्या होगा इसको वह अभी नहीं बता सकते और
मीडिया से वेट एंड वॉच के लिए कहा.
वहीं हरियाणा सरकार ने 17 नवंबर को एसवाईएल के
मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है जिसमें हरियाणा के
नेता अपनी रणनीति तय करेंगे. लेकिन इस मीटिंग से
पहले ही हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने
कहा कि अब हरियाणा सरकार को एसवाईएल को लेकर
कोई बोल्ड स्टेप लेना होगा और केंद्र सरकार को पंजाब
राष्ट्रपति शासन लगवा देना चाहिए और एसवाईएल का
निर्माण पूरा करवाना चाहिए. वहीं हरियाणा में विपक्ष के
नेता और इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय
चौटाला ने कहा कि अगर SYL को लेकर पंजाब ने
अगले तीन महीनों में काम शुरु नहीं किया तो 23
फरवरी से इंडियन नेशनल लोकदल के कार्यकर्ता खुद ही
नहर की खुदाई शुरु कर देंगे.
बुधवार को पंजाब विधानसभा का स्पैशल सत्र बुलाया गया है और इस सत्र में पंजाब सरकार एसवाईएल के पानी को पंजाब में ही रोकने के लिये कोई कड़ा प्रस्ताव या बिल पारित किया जा सकता है और जाहिर तौर पर पंजाब सरकार का ऐसा कोई भी कदम पंजाब और हरियाणा के बीच चल रही टेंशन को ओर भी बढ़ा सकता है.