पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली. बादल ने बुधवार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. बीजेपी में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह ने कहा कि आप उस पार्टी के साथ कैसे काम कर सकते हैं जो खुद से युद्ध कर रही है? मंडलियां हैं. एक को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता है, दूसरे को विधायक दल का नेता बनाया जाता है और ये गुट आपस में लड़ते हैं. हर राज्य में ऐसी स्थिति है, कांग्रेस का यही हाल है.
मनप्रीत सिंह बादल ने आगे कहा- राजनीति में बहुत कम मौके मिले हैं. मैं एक 'शेर' से मिला हूं, कुछ दिन पहले एक 'शेर' से मिला हूं और वो हैं भारत के गृह मंत्री अमित शाह. उन्होंने पंजाब के बारे में दिल को छू लेने वाली बात कही. गृह मंत्री ने कहा कि पंजाब ने भारत के लिए 400 हमले झेले. हम लोग मिलकर पंजाब का विकास सुनिश्चित कराएंगे.
मनप्रीत बादल ने इस्तीफे में लिखा, 'यह लिखते हुए मैं बेहद दुखी महसूस कर रहा हूं कि मुझे कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ रहा है. सात साल पहले मैंने पीपुल्स पार्टी का विलय कांग्रेस में कर किया था. मैंने यह फैसला कांग्रेस पार्टी के गौरवशाली इतिहास को देखते हुए लिया था. मेरी कोशिश थी कि ऐसा करके में पंजाब के लोगों और संगठन के लिए बेहतर तरीके से काम कर सकूं.'
उन्होंने आगे लिखा, 'पंजाब के वित्त मंत्री की कुर्सी संभालना मेरे लिए आसान नहीं था. वर्तमान में मेरे सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं. या तो मैं अपनी आंखें बंद करके सच्चाई को अनदेखा कर दूं या एक कठिन निर्णय लेकर चीजें ठीक करने की कोशिश करूं. मैं दूसरे विकल्प को चुनना पसंद करूंगा.'
बता दें कि मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के भतीजे हैं. कांग्रेस में रहते समय उनकी पटरी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के साथ नहीं बैठ रही थी. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जब पंजाब से गुजरी थी, तब भी मनप्रीत सिंह बादल उसमें दिखाई नहीं दिए थे.
मनप्रीत पांच बार विधायक और 2 बार पंजाब के वित्त मंत्री रह चुके हैं. अकाली दल से निष्कासित होने के बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई थी. बाद में मनप्रीत ने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था. उन्होंने भाकपा और शिअद (लोंगोवाल) के साथ मिलकर सांझा मोर्चा बनाया था. लेकिन चुनाव में इस मोर्चे का वोट शेयर महज 6 फीसदी ही रह गया था. मनप्रीत ने जब शिअद से रास्ते अलग किए थे तो वह बादल सरकार में वित्त मंत्री थे.
बता दें कि पिछले साल पंजाब में हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. चुनाव से पहले तक यहां चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी. लेकिन चुनाव के बाद बहुमत हासिल करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) ने बंपर जीत दर्ज की थी. पिछले चुनाव में कई बड़े उलटफेर भी देखने को मिले थे.
तब के चुनाव में तत्कालीन सीएम चन्नी, कांग्रेस के दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, बिक्रम मजीठिया, प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल जैसे दिग्गज भी अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं हो पाए थे.