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अमरिंदर ने बांटे मंत्रियों को विभाग, सिद्धू के हिस्से में 'आर्काइव और म्यूजियम'

पंजाब में दस वर्षों के अंतराल के बाद एक बार कैप्टन अमरिंदर सिंह को कमान मिल गई. चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बतौर मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. अमरिंदर सिंह के साथ 7 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया. हालांकि इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उपमुख्यमंत्री के पद का प्रबल दावेदार माने जा रहे नवजोत सिंह सिद्धू को महज कैबिनेट मंत्री के पद से ही संतोष करना पड़ा.

शपथ ग्रहण के बाद कैप्टन के पैर छूकर आशीर्वाद लेते सिद्धू शपथ ग्रहण के बाद कैप्टन के पैर छूकर आशीर्वाद लेते सिद्धू

चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बतौर मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. अमरिंदर सिंह के साथ 7 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया.

आज चंडीगढ़ के पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 7 कैबिनेट और 2 मंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण किया. मंत्रियों के बीच मंत्रालयों का बंटवारा भी हो गया है.

किसके पास है कौन सा मंत्रालय
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्रालय अपने पास रखा है. चुनाव के ठीक पहले बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को स्थानीय निकाय मंत्रालय, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों, अभिलेखागार और संग्रहालय मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है.

इसके अलावे मनप्रीत बादल को वित्त मंत्रालय, नियोजन और रोजगार सृजन मंत्रालय का भार दिया गया है. अरूणा चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है. चरणजीत चन्नी, राज्य के नए तकनीकी शिक्षा और अद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री बनाए गए हैं.

वहीं राणा गुरजीत को सिंचाई और बिजली मंत्रालय, साधू सिंह धरमसोत को वन, छपाई और स्टेशनरी, अनुसूचित जातियों और पिछड़ी जाति कल्याण मंत्रालय, रजिया सुल्तान को शहरी विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल सामाजिक विकास मंत्रालय और ब्रह्म मोहिंद्रा को स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और संसदीय मामले मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है.

हालांकि इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उपमुख्यमंत्री के पद का प्रबल दावेदार माने जा रहे नवजोत सिंह सिद्धू को महज कैबिनेट मंत्री के पद से ही संतोष करना पड़ा.

सूत्रों के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित पंजाब कांग्रेस के अन्य पुराने व वरिष्ठ नेताओं का धड़ा नहीं चाहता था कि विधानसभा चुनाव से महज 15 दिन पहले पार्टी में शामिल हुए सिद्धू को पंजाब सरकार में दूसरे नंबर के पद पर बिठा दिया जाए. इन पुराने कांग्रेसी नेताओं के धड़े का ये दबाव काम भी आया और आलाकमान तथा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर लगातार दबाव डालने के बावजूद सिद्धू डिप्टी सीएम बनते बनते रह गए.

डिप्टी सीएम पद ना मिलने की यह टीस सिद्धू के चेहरे पर भी दिखी. जब शपथ ग्रहण करने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू मंच पर आए तो उन्होंने दूसरे मंत्रियों की तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह को कोई अभिवादन नहीं किया और जब वह शपथ लेकर नीचे लौट रहे थे, तब भी उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह को अनदेखा कर दिया. हालांकि फिर कैप्टन ने खुद हाथ उठाकर नवजोत सिंह सिद्धू का अभिवादन किया. इसके बाद सिद्धू ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया.

इस पूर्व क्रिकेटर के चेहरे पर डिप्टी सीएम का पद ना मिलने की टीस तब भी साफ दिखी, जब शपथ ग्रहण के बाद पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि पंजाब के लोगों के लिए बतौर मंत्री वह क्या करने वाले हैं, तो सिद्धू इन तमाम सवालों को दरकिनार करके मीडिया के सवालों से बचते नजर आए.

कांग्रेस ने सिद्धू की इस नाराजगी और डिप्टी सीएम पद खोने की टीस पर पर्दा डालने की कोशिश की. पंजाब कांग्रेस के कई नेता तो इस सवाल को टाल गए और कई नेताओं ने कहा कि सिद्धू ने ना तो डिप्टी सीएम का पद मांगा था और ना ही कांग्रेस की तरफ से पार्टी ज्वॉइन करते वक्त उन्हें ऐसा कोई वादा किया गया था.

वहीं इस पूरे मुद्दे पर पंजाब कांग्रेस की प्रभारी आशा कुमारी का कहना था कि डिप्टी सीएम के कयासों को लेकर जो बातें उठ रही हैं, वह मीडिया का ही बनाया हुआ जाल है. उन्होंने कहा, 'इन कयासों में किसी भी तरह की कोई सच्चाई नहीं है. सिद्धू कांग्रेस पार्टी के असली सिपाही हैं और बिना किसी पद की चाह में वो पंजाब के हित में काम करना चाहते हैं.'

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