आम आदमी पार्टी ने पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल पर फ्रेंडली मैच खेलने और एक-दूसरे के भ्रष्टाचार को छुपाने का आरोप लगाया है. अरविंद केजरीवाल ने मीडिया रिपोर्ट को शनिवार को ट्वीट किया और अकाली दल और कांग्रेस पर पंजाब में मिलीभगत के आरोप लगाए.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ उनके सीएम रहते हुए अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की करीब 32 एकड़ जमीन को प्राइवेट डेवेलपर्स को औने-पौने दाम में देने के आरोप लगे. इस मामले में विधानसभा की समिति की सिफारिश के बाद सितंबर 2008 में केस दर्ज किया गया था. जिसमें कैप्टन अमरेंद्र सिंह और 17 अन्य के खिलाफ 2009 में विजिलेंस ब्यूरो ने चार्जशीट फाइल करके कैप्टन अमरेंद्र सिंह से पूछताछ भी की थी.
कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने इस मामले के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट में इस केस को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इस केस को रद्द करने की मांग थी. 2014 में हाइकोर्ट ने इस मामले की दोबारा जांच के आदेश पंजाब सरकार को दिए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब सरकार ने इस मामले में निचली अदालत में जवाब दाखिल किया है कि इस मामले में कैप्टन अमरेंद्र सिंह के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं बनती और इस केस को खत्म कर देना चाहिए.
पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस केस से कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरेंद्र सिंह को कोर्ट में पंजाब सरकार की और से जवाब दाखिल करके क्लीन चिट दिए जाने के मामले में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और पर हमला बोलते हुए कहा कि इससे साफ हो जाता है कि पंजाब में बादल परिवार और कैप्टन अमरेंद्र परिवार मिले हुए हैं. इनकी वजह से ही कांग्रेस और अकाली दल पंजाब में फ्रेंडली मैच खेल रही है. आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सुखपाल खेहरा ने कहा कि अब जब दोनों ही पार्टियों की सांठ-गांठ सबके सामने आ चुकी है तो फिर दोनों पार्टियों को आने वाले में मिलकर ही चुनाव लड़ लेना चाहिए.
Need more proof of collusion betn Akalis n Cong? This happening just before elections. It means Akalis n Cong r jointly fighting elections
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal)
वहीं अकाली दल ने कहा कि को इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है. इस मामले में कोर्ट में कार्रवाई चल रही है और कैप्टन अमरेंद्र सिंह को इस मामले में कोर्ट के सामने पेश भी होना पड़ा है. पंजाब सरकार भी कानून के तहत इस मामले में कार्यवाई करेगी.
वहीं कांग्रेस ने कहा कि पंजाब की अकाली-बीजेपी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 2008 में कैप्टन अमरेंद्र सिंह के खिलाफ ये मामला राजनीतिक द्वेष में दर्ज किया था. इसी वजह से अब पंजाब सरकार को इस मामले में कैप्टन अमरेंद्र सिंह को क्लीन चिट देनी पड़ रही है. वहीं कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने कहा कि वो ऑर्मी में रह चुके हैं, उन्हें अच्छे से पता है कि किन सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना है.
पहले भी कई बार पंजाब में अकाली दल और बीजेपी पर मिलीभगत के आरोप लगाती रही है. अब पंजाब की अकाली-बीजेपी सरकार के कैप्टन अमरेंद्र सिंह को जमीन आवंटन के क्लीन चिट दिए जाने की खबरों ने इस आरोप को और हवा दे दी है.