जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेता मसरत आलम की गिरफ्तारी के बाद घाटी के हालात बिगड़ते जा रहे हैं.
शुक्रवार को श्रीनगर में पत्थरबाजी की घटना में करीब 16 लोग जख्मी हो गए, जिनमें पुलिस के जवान भी शामिल हैं.
विरोध प्रदर्शन की अगुवाई मीरवाइज उमर फारूक कर रहे थे. मीरवाइज सेना के ऑपरेशन में युवक के मारे जाने के विरोध में त्राल जा रहे थे.
मीरवाइज के समर्थकों ने भी भारत विरोधी नारे लगाए. पत्थरबाजी रोकने के लिए पुलिस ने पहले लाठीचार्ज का सहारा लिया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
श्रीनगर के पुराना शहर इलाके में जुमे की नमाज के बाद पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई. पुराना शहर इलाके में नौहट्टा स्थित जामिया मस्जिद के बाहर जुमे की नमाज के तुरंत बाद पथराव कर रहे युवाओं की सुरक्षा बलों से झड़प शुरू हो गई. प्रदर्शन हिंसक हो गया, क्योंकि युवाओं ने सुरक्षाबलों पर पथराव कर दिया.
दरअसल, कश्मीर में पत्थरबाजी विरोध का हथियार भी है और राजनीति साधने का हथियार भी. साल 2010 में मसरत ने पत्थरबाजों की एक फौज तैयार की थी. लगातार पत्थरबाजी के जरिए उसने न केवल घाटी को हिला दिया था, बल्कि इसी वजह से 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी.
वजह मसरत की गिरफ्तारी हो या त्राल में एनकाउंटर में कथित निर्दोष के मारे जाने का तर्क, घाटी के सैकड़ों युवाओं ने फिर हाथों में पत्थर उठा लिए. विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है.
देखना है कि कश्मीर घाटी में विरोध प्रदर्शन का दौर कब थमता है.