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भारत

जब दलित सम्मेलन में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी हुए भावुक

जब दलित सम्मेलन में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी हुए भावुक
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गौरतलब है कि दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की स्थापना 2005 में हुई थी. यह खास तौर पर दलित उद्यमियों को कारोबार की संभावनाएं बताने और उन्हें बढ़ावा देने का काम करता है. दलित एक्टिविस्ट चंद्रभान इसके सदस्य हैं.
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मोदी ने कहा कि हम सभी बाबा साहेब अंबेड़कर को संविधान निर्माता के तौर पर जानते हैं. बहुत से लोग नहीं जानते कि बाबा साहेब बहुत बड़े अर्थशास्त्री भी थे. बाबा साहेब सही कहते थे कि औद्योगीकरण का सबसे ज्यादा फायदा हमारे दलित भाई-बहनों को होगा. हमारी सरकार आपकी सरकार है. हम आपके सशक्तीकरण के लिए काम कर रहे हैं. देश में औद्योगीकरण होगा तो दलित को रोजगार मिलेगा. अंबेड़कर ने हमें संविधान दिया, पर हम अधिकारों की ज्यादा बात करते हैं और कर्त्तव्यों की कम.
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उन्होंने कहा, फाइनेंशियल इन्क्लूजन हमारा सबसे बड़ा मकसद है. उन्होंने कहा कि समाज के निचले तबके के लोगों को मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें रोजगार सृजन करने वाले चाहिए, न कि रोजगार तलाश करने वाले.
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मोदी ने भाषण के दौरान पीएम मुद्रा योजना का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 80 लाख लोग बिना एक रुपये की गारंटी के ही बैंकों से लोन ले चुके हैं. उनमें से ज्यादातर दलित और एन्य पिछड़ा वर्ग के हैं.
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पीएम मोदी अपना भाषण खत्म कर सारे नियम और प्रोटोकॉल तोड़कर मंच से उतरकर लोगों के बीच आ गए और फोटो खिंचवाने लगे. सम्मेलन में आए लोगों ने पीएम का यह दोस्ताना व्यवहार देख उनके साथ खूब सेल्फी ली. दलित एक्टिविस्ट चंद्रभान यह दृश्य देखकर इतने भावुक हो उठे कि मोदी शुक्रिया अदायगी का अपना भाषण भी पूरा न कर सके.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक दलित सम्मेलन में कहा कि आपकी तरह मैंने भी अपमान सहा है. सामंतशाही मानसिकता आज भी दिखती है. उन्होंने कहा कि दलितों ने हर अपमान झेला है. दलितों को लोन लेने के लिए लोहे के चने जबाने पड़ते हैं. मोदी ने यह बात दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सम्मेलन में कही.