इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने भारतीय ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-सी 21 (पीएसएलवी-सी21) के माध्यम से दो विदेशी उपग्रहों को रविवार सुबह उनकी कक्षा में स्थापित किया.
इसके साथ ही इसरो का 100वां अंतरिक्ष अभियान पूरा हो गया.
इसरो का यह अभियान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ.
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों तथा देशवासियों को इसकी बधाई दी है.
सुबह ठीक 9.51 बजे 44 मीटर लम्बे और 230 टन वजनी पीएसएलवी-सी21 ने दो उपग्रहों के साथ उड़ान भरी.
इनमें से एक 712 किलोग्राम वजनी फ्रांसीसी उपग्रह एसपीओटी-6 और 15 किलोग्राम का जापानी प्रायटेरेस उपग्रह शामिल है.
इस अभियान पर 75 करोड़ रुपये लागत आई है. पीएसएलवी का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुआ.
यह इसरो का 100वां अंतरिक्ष मिशन है. इसरो ने सबसे पहले 1975 में आर्यभट्ट उपग्रह का प्रक्षेपण रूसी रॉकेट से किया था.
आग की लपटों और धुओं के बीच रॉकेट जब आसमान की ओर बढ़ रहा था तो प्रक्षेपण केंद्र पर एकत्र इसरो के वैज्ञानिकों एवं मीडिया कर्मियों के चेहरे खिले हुए थे.
इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने प्रक्षेपण के बाद वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों को धन्यवाद दिया.