बेमौसम बारिश से परेशान किसानों को मानसून से कुछ उम्मीदें हैं. देर से आने के बाद
मानसून सुस्त चाल से आगे बढ़ रहा है. जानकारों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में
अगर मानसून स्पीड पकड़ लेता है तो किसानों को राहत मिल सकती है. आगे तस्वीरों में जानिए मानसून और देश के मौजूदा हालात को...
इस वक्त देश में मानसून का हाल देखा जाए तो 1 से 10 जून तक कुल बारिश 36.4 मिलीमीटर
रही, जो इस अवधि के औसत स्तर 36.2 मिलीमीटर से कुछ ज्यादा है. हालांकि इसकी एक वजह
पश्चिमी राजस्थान, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर जैसे इलाकों में ज्यादा बारिश
है, जो खेती-बाड़ी के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं.
अरब सागर में चक्रवात की स्थिति बनने और ओमान की ओर बढ़ने की से मौसम विभाग ने
चिंता व्यक्त की हैं. चक्रवात की वजह से वातावरण की नमी सोख ली गई है, जिससे मानसून
को लेकर की भविष्यवाणियों पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं.
मानसून अभी कोंकण तट, गोवा, केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर की ओर सीमित है. मौसम पूर्वानुमान लगाने वाली निजि संस्था स्काईमेट का अनुमान है कि मानसून 10 दिनों की देर से 15 जून के
आसपास हैदराबाद पहुंचेगा.
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मानसून को लेकर कहा था कि सरकार के पास अनाज के पूरे
भंडार हैं. कम मानसून को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. वहीं भू-विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन ने
कहा कि वो ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि मौसम विभाग का अनुमान गलत हो जाए.
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब तक मानसून को मुंबई पहुंच जाना चाहिए था और बिहार,
आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के सूखे खेतों को तर कर देना चाहिए था.
स्काईमेट का कहना है कि अरब सागर में बने चक्रवात आशोबा ने मानसून को सुस्त कर
दिया है और 10 जून से पहले इसकी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद नहीं है.
पश्चिम बंगाल में बारिश सामान्य से 80 फीसदी कम रही है, जिसे अब तक मानसून की बौछारों में तरबतर हो
जाना चाहिए था. उधर, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में सामान्य से दोगुनी बारिश हुई है.
मानसून पर मौसम विभाग की आशंका को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री कृषि
योजना' की समीक्षा पर जोर देना शुरू किया. हाल ही में मोदी ने इस बाबत कमजोर बारिश
को चुनौती को एक अवसर में बदलने की बात कही.
याद रहे कि खराब मौसम की वजह से पूरे देश में काफी किसान आत्महत्या कर रहे हैं. महाराष्ट्र
में इस साल मई के आखिर तक करीब 1,088 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.