बंगाल में राजनीतिक हिंसा की आग किस कदर फैली है वो इस कहानी से समझिये. नॉर्थ 24 परगना के रहने वाले सैकत भवाल के बारे में सब अच्छा ही कहते हैं. लेकिन कहीं किसी के राजनीतिक द्वेष का शिकार होकर उसे ऐसे जान गंवानी पड़ी कि उसकी मां को उसका मृत शरीर भी नहीं देखने दिया जा रहा था. बंगाल इस हिंसा से कब ऊबेगा? कब खत्म होंगी इस तरह की कहानियां?