पब्लिक जानती है कि जैसे ही 7 मार्च को वोट पड़ने बंद होंगे, तेल की महंगाई उनकी जेब जलानी शुरू कर देगी. इसीलिए अगले महीने की 7 तारीख का ख्याल आने भर से लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो जा रही हैं. सरकार के मंत्री से लेकर सांसद और नेता, भारत में तेल महंगा होने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार को जिम्मेदार बता रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि अगर वाकई में तेल के दाम बढ़ने के पीछे विदेशी हाथ होता है तो फिर कच्चे तेल में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी के बावजूद भारत में तेल के दाम अंगद के पैर की तरह कैसे जमे हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है और जल्द ही इसके 100 डॉलर छूने की आशंका है. देखें ये रिपोर्ट.