भागने से पहले अमृतपाल ने अपना हुलिया बदला. ये काम उसने जालंधर से 50 किलोमीटर दूर नंगला अंबियन गुरुद्वार में किया. इस गांव के लोग ये बता रहे हैं कि अमृतपाल तीन-चार लोगों के साथ कार से गुरुद्वारे पहुंचा.