सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने ओएनजीसी तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का स्वत: संज्ञान लेने को चेतावनी दी. साथ ही, सामान्य नोटिस जारी कर आर्बिट्रेशन में लापरवाही बरतने पर जवाब मांगा.
चीफ जस्टिस एनवी रमणा की अगुआई वाली तीन जजों की पीठ ने आर्बिटेशन समिति के आदेश को चुनौती देने और फीस ना देने पर, ओएनजीसी के खिलाफ ये कदम उठाया है. नाराज चीफ जस्टिस ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल को तलब किया.
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में आर्बिट्रेशन के लिए वकील और तीन पूर्व जज नियुक्त किए थे, लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखते हुए खुद को इस प्रक्रिया से यह कहते हुए अलग कर लिया कि ओएनजीसी उनको आर्बिट्रेशन के लिए तय फीस नहीं दे रहा है. कोर्ट ने इसी बात पर ओएनजीसी को डांट पिलाई और चेतावनी भी दी.
चीफ जस्टिस ने फटकार लगाते हुए ओएनजीसी से कहा- 'आप खुद को समझते क्या हैं? आपने हमारे आदेश और आर्बिट्रेशन कर रहे जजों की चिट्ठी तो पढ़ ली होगी. अब आपकी दलील क्या है? हम स्वत: संज्ञान लेते हुए आपके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चला रहे हैं. आप जजों का अनादर कर रहे हैं. आपके पास ज्यादा धन है तो आपका घमंड और अहम काफी बढ़ गया है.'
अटॉर्नी जनरल के पेश होने और फीस की अदायगी का वचन देने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्यवाही टाल दी है. अटॉर्नी जनरल से इस मामले में दखल देने को कहकर, कोर्ट ने सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए टाल दी है.