दिल्ली की एक अदालत ने रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले में शुक्रवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी बेटी मीसा भारती तथा हेमा यादव को 28 फरवरी तक अंतरिम जमानत दी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आरोपी व्यक्तियों देवी, भारती, यादव और हृदयानंद चौधरी द्वारा दायर नियमित जमानत याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने के बाद विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आदेश पारित किया. अंतरिम जमानत एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानत बांड पर दी गई.
न्यायाधीश ने मामले में आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद आरोपियों को समन जारी किया था. कथित घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान रेल मंत्री थे.
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आरोप है कि 2004 से 2009 तक, भारतीय रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में समूह ‘‘डी’’ पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया गया था और बदले में, इन लोगों ने अपनी जमीन तत्कालीन रेल मंत्री प्रसाद के परिवार के सदस्यों और ‘ए के इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को हस्तांतरित कर दी थी.
ईडी की चार्जशीट में क्या है, जानिए
ईडी का आरोप है कि इस मामले में बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी की भी भूमिका है. ईडी के अनुसार, राबड़ी देवी के माध्यम से ही पीओसी में बदलाव किया गया था, जिसका उपयोग दिल्ली में एक शेल कंपनी के माध्यम से अचल संपत्ति के अधिग्रहण को वैध बनाने में किया गया. जबकि दावा किया गया था कि लेनदेन वैध थे. ईडी ने कहा है कि राबड़ी देवी ने अधिकांश लेनदेन में अनभिज्ञता जताई है, हालांकि इस साजिश में वह अपने पति लालू प्रसाद यादव के साथ मिली हुई हैं.
ईडी ने तर्क दिया है कि राबड़ी देवी ने अपराध से प्रत्यक्ष आय अर्जित की है और बाद में पीओसी का रूप बदलने के लिए कुछ हिस्सा बेच दिया और इस पीओसी को अपने बेटे को दे दिया, जिसका उपयोग बाद में डी-1088 में मूल्यवान संपत्तियों के निर्माण में किया गया.
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मीसा भारती के बारे में ईडी ने कहा है कि मीसा भारती ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर अपराध से आय अर्जित की. इसलिए इस बात के सबूत हैं कि वह जानबूझकर और सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में शामिल थी.
हेमा यादव
ईडी ने कहा कि हेमा मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थी. वह बिक्री से हुए आय को बाद में लेनदेन के माध्यम से अपने परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर कर देती थी. वहीँ, अमित कात्याल ने लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर साजिश रची.
ईडी ने अपने आरोप पत्र में कहा कि अमित कात्याल ने लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर आरओसी दिल्ली में एक कंपनी बनाने और नौकरी चाहने वालों से बिहार में स्थित जमीन खरीदने की साजिश रची. ईडी के अनुसार, अमित कात्याल ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों की सहायता की. ED का कहना है कि अमित कात्याल ने तेजस्वी यादव को भुगतान भी किया है, जिसका उपयोग तेजस्वी यादव ने मेसर्स एबीईपीएल के शेयर खरीदने के लिए किया था. अमित कात्याल ने एबीईपीएल के शेयर हासिल करने में तेजस्वी यादव की सहायता की, जो मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल संपत्ति है.