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राजनीति के नाम पर पैसों की हेराफेरी... कैसे बेवकूफ बना रहीं हैं राजनीतिक पार्टियां?

फर्जीवाड़ा और पैसों का गबन करने वाली राजनीतिक पार्टियां अब चुनाव आयोग की रडार पर हैं. पता चला है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की ऐसी राजनीतिक पार्टियां शामिल हैं, जो पैसों की हेराफेरी करने और गलत तरीके से टैक्स में छूट का फायदा उठातीं हैं. 

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राजनीति के नाम पर पैसों की हेराफेरी
राजनीति के नाम पर पैसों की हेराफेरी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देशभर की 2,100 से ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां
  • पार्टियों के पास खर्च का ब्योरा नहीं, बैलेंस शीट में भी गड़बड़

फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने वालीं राजनीतिक पार्टियां अब चुनाव आयोग के रडार पर आ गईं हैं. चुनाव आयोग ने ऐसी पार्टियों के खिलाफ एक्शन की तैयारी कर ली है. इनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की ऐसी राजनीतिक पार्टियां शामिल हैं, जो पैसों की हेराफेरी करने और गलत तरीके से टैक्स में छूट का फायदा उठातीं हैं. 

हाल ही में राजीव कुमार नए मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए गए हैं. उनके सीईसी बनने के बाद अब ऐसी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ एक्शन की तैयारी शुरू हो गई है. राजीव कुमार ने ऐसी पार्टियों पर जांच कराई थी. इस जांच के बाद देशभर की 2,100 से ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

इसमें उत्तर प्रदेश की अपना देश पार्टी, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की राजनीतिक विंग सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र की सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्टी चुनाव आयोग के रडार पर हैं.

करोड़ों की हेराफेरी, कई अनियमितताएं

चुनाव आयोग से जुड़े एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया कि राजनीतिक पार्टियां करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर रही हैं. जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं हैं. अभी भी जांच चल ही रही है. इसके बाद चुनाव आयोग ने 111 रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीति पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फैसला लिया है.

ये दूसरी बार है जब चुनाव आयोग इस तरह का सफाई अभियान चला रही है. इससे पहले 25 मई को भी 87 राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया था.

चुनाव आयोग के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि राजनीतिक पार्टियों को आईटी एक्ट की धारा 13ए के तहत टैक्स बेनिफिट मिलते हैं. हालांकि, जांच में सामने आया कि कई सारी पार्टियां गैर-कानूनी गतिविधियों में भी शामिल हैं. राजनीतिक पार्टियों को डोनेशन पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है. इंडिया टुडे ने जब राजनीतिक पार्टियों के ऑडिट अकाउंट को खंगाला तो पता चला कि ज्यादातर पार्टियों ने अपनी कमाई और खर्च का ब्यौरा, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट की सही तरह से जानकारी नहीं दी थी.

1. अपना देश पार्टी की पड़ताल

पार्टी अध्यक्ष का नाम कुछ और है, जबकि डॉक्यूमेंट्स पर साइन किसी और के हैं. फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स में ए. रजाक के सिग्नेचर हैं और उसने खुद को पार्टी अध्यक्ष बताया है. जबकि, ऑडिट अकाउंट में अब्दुल बी. रजाक पठान के साइन हैं और इसने खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताया है.

ए रजा के लेटर में पार्टी का एड्रेस 428, 4th फ्लोर, शीतल वर्षा महावीर बिजनेस पार्क, जमालपुर, अहमदाबाद दर्ज है, जबकि पार्टी का रजिस्टर्ड एड्रेस सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश है. 

हालांकि, ऑडिटर ने 457, मजोरगंज, सुल्तानपुर, यूपी ही एड्रेस बताया है. ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर ज्योति मोतवानी के साइन हैं.

2018-19 के इलेक्शन रूल्स के फॉर्म 24ए में अब्दुल मबूद का नाम पार्टी प्रेसिडेंट के तौर पर है. लेकिन इसमें बतौर प्रेसिडेंस ए. रजाक के साइन हैं.

अपना देश पार्टी के अध्यक्ष बताने वाले अब्दुल मबूद ने बताया है दो अलग-अलग दस्तावेजों में बताया है कि पार्टी को 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में न तो कोई कमाई हुई है और न ही कुछ खर्च हुआ है. हालांकि, इसके बावजूद एक दस्तावेज में पार्टी ने बताया है कि 2017-18 में उसे मेंबरशिप और मनी कोऑपरेशन से 37.16 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से 27.47 करोड़ रुपये प्रचार और 9.46 करोड़ पब्लिक वेलफेयर में खर्च किए हैं. हालांकि, ये पैसा कहां से आया, किसने दिया और कैसे दिया, इसका जिक्र पार्टी ने नहीं किया है.

इसके अलावा पार्टी ने ये भी दावा किया है कि 2018-19 में उसे 80.06 करोड़ और 2019-20 में 115 करोड़ रुपये की टैक्स छूट मिली है. लेकिन पार्टी ने कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट नहीं दी है.

2. सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया

एसडीपाई दिल्ली स्थित राजनीति पार्टी है, जिसकी स्थापना 21 जून 2009 को हुई थी और 13 अप्रैल 2010 को इसे चुनाव आयोग में रजिस्टर कराया गया था. एसडीपाई पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की राजनीतिक विंग है.

जांच में पता चला है कि इस पार्टी दक्षिण भारत से काफी ज्यादा डोनेशन मिला है. पार्टी ने अपना एड्रेस सी-4, हजरत निजामुद्दीन वेस्ट, नई दिल्ली-13 बताया है. 

चुनाव आयोग में जमा कराए गए दस्तावेजों में पार्टी ने बताया है कि उसे 2018-19 में 5.17 करोड़ रुपये, 2019-20 में 3.74 करोड़ रुपये और 2020-21 में 2.86 करोड़ रुपये का चंदा मिला है. जो पार्टी दिल्ली में रजिस्टर्ड है, उसे करीब 10 करोड़ रुपये तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से मिले हैं.

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस के हरिपाल ने हाल ही में अपने एक आदेश में कहा था कि एसडीपीआई और पीएफआई एक 'चरमपंथी संगठन' हैं, लेकिन फिर भी ये प्रतिबंधित नहीं हैं.

3. सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्टी

- ये महाराष्ट्र स्थित राजनीतिक पार्टी है. इसके अध्यक्ष दशरथ भाई पारेख हैं. इंडिया टुडे की जांच में पता चला है कि पार्टी की दो साल की बैलेंस शीट मैच नहीं करती है, जो पैसे के गबन की ओर इशारा करता है. ये पार्टी गोल्ड में भी निवेश करती है. ऐसे में सवाल उठता है कि एक राजनीतिक पार्टी को गोल्ड में निवेश करने की जरूरत क्यों पड़ गई?

- पार्टी की बैंलेस शीट के मुताबिक, उसे 2018-19 में 29.87 करोड़ और 20198-20 में 41.19 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है. हालांकि, कंपनी की दो साल की बैलेंस शीट में काफी अंतर दिख रहा है. बैलेंस शीट के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक कंपनी की बैलेंस शीट में 1.64 करोड़ रुपये की रकम दिखाई गई थी. लेकिन, अगले साल 49.25 लाख रुपये की रकम बताई. एक साल में ही बैलेंस शीट में 1.15 करोड़ रुपये की कमी आ गई, लेकिन पार्टी इसका कारण नहीं बता पाई. 

- इतना ही नहीं, 5 जनवरी 2021 को पार्टी ने कश्यप पटेल एसोसिएट्स (सीए कश्यप कुमार ईश्वर भाई पटेल) को अपना ऑडिटर नियुक्त किया था. हैरानी की बात ये है कि सीए कश्यप कुमार दूसरी पार्टियों का ऑडिट भी संभालते हैं. दस्तावेज बताते हैं कि वो एक ही दिन में, एक ही रेफरेंस में, तीन अलग-अलग पार्टियों का काम संभाल रहे हैं.

- 2018-19 की बैलेंस शीट पर मिक्सित नरेश कुमार कोठारी के सिग्नेचर हैं. हैरानी की बात ये है कि इस साल पार्टी ने अपनी संपत्ति और देनदारी का ब्यौरा भी नहीं दिया है. इस पर सीए कश्यप कुमार के साइन हैं. इसी ऑडिटर ने 2018-19 में भारतीय किसान परिवर्तन पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट पर भी साइन किए हैं. इस पार्टी का पता फिरोजाबाद में है. इस पार्टी को डोनेशन के तौर पर 3.84 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है और इसने 1.78 करोड़ रुपये गोल्ड में भी निवेश किए हैं.

- नियमों के मुताबिक, पार्टी को कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट देना जरूरी है, लेकिन महाराष्ट्र सीईओ की वेबसाइट पर 2019-20 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट नहीं थी. इस कारण SBVP का नाम डिफॉल्टर की लिस्ट में भी था.

- चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए दस्तावेजों को CBDT या सेंटर बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स के पास भेज दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी.

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