राजनीति हमेशा से अनप्रीडिक्टेबल कही जाती है. ख़ास कर बात जब यूपी बिहार की हो. लेकिन बिहार की राजनीति का नीतीश काल और ज़्यादा अप्रत्याशित रहा है. नीतीश कुमार वक्त वक्त पर पासा उलटते पलटते रहते हैं, कभी इधर कभी उधर. इन दिनों स्थिर ज़रूर हैं. भविष्य पर बात कर रहे हैं, तेजस्वी को बिहार सौंपने की भी. लेकिन उनकी तासीर तो शरद यादव समेत जदयू के तमाम नेताओं को चौंकाने वाली ही रही है. यही वजह है कि बीजेपी जो अब नीतीश से दूर है, अब तक खुल कर हमले से बच रही है, राजद को और उनके नेताओं को ये यकीन नहीं कि नीतीश जहाँ आज हैं वहीं कल भी होंगे. इसी तरह जदयू भी और नीतीश कुमार भी संभावनाओं के ऑप्शन खुले रखे हुए हैं. पुरानी साथी बीजेपी से कम कड़वाहट के साथ राजद के साथ घनिष्ठता से ज़रूरी परहेज भी दिखा रहे हैं. राजद के एक मंत्री के बयान का विरोध जदयू के ही नेता बीजेपी से ज़्यादा तेज़ कर रहे हैं, साफ है कि पटरी बैठ नहीं रही. सब कुछ अभी जम नहीं सका है.
क्यों ऐसा लग रहा है कि बिहार में नई सरकार बना लेने के बावजूद भी अस्थिरता और कन्फ्यूजन का बादल अब तक बरकरार है- और इन सब मे नीतीश कुमार का अप्रोच किस तरह का दिखाई दे रहा है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक है. कांग्रेस गहलोत-पायलट के टसल से परेशान है लेकिन तैयारियां उसकी भी तेज हैं. कल बीजेपी के खेमे से भी एक खबर आई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 जनवरी को राजस्थान के भीलवाड़ा में होंगे. ऐसे तो इसे सामान्य चुनावी दौरा कह लें,लेकिन इसे इस इलाके और यहाँ रह रही आबादी के पॉइंट ऑफ व्यू से समझते हैं. भीलवाड़ा गुर्जर बाहुल्य इलाका है. 28 जनवरी को गुर्जर समुदाय के लोकदेवता देवनारायण की 1111वीं जयंती है और इसी कार्यक्रम में वो शामिल होंगे. माना ये जा रहा है कि सचिन पायलट की वजह से गुर्जरों की नाराज़गी का फ़ायदा बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से उठाना चाहती है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ़ से कोई भी गुर्जर उम्मीदवार पायलट की वजह से नहीं जीत पाए थे. लेकिन बीजेपी इस बार इस फैक्टर को अपने पाले में करना चाहती है. बहरहाल, राजस्थान में कांग्रेसी खेमा जब खुल कर कलह जाहिर कर रहा है, एन्टी इनकम्बेंसी की बात कही जा रही है तब चुनाव जीतने के लिए बीजेपी की रणनीति अब तक की कैसी दिख रही है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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अमेरिका में आम लोगों के हथियार रखने से जुड़े धीरे कानूनों की आलोचना लगातार होती रहती है. लेकिन दिक्कत बस इतनी ही है कि ये आलोचना किसी एक अनहोनी से शुरू होती है और फिर लोग इसे भूल जाते हैं. अभी एक ओपन फायरिंग या शूटिंग की घटना होती है कि तब तक दूसरी की खबर आ जाती है. कल अमेरिका में संडे की सुबह नहीं हुई थी, भारत में दोपहर की धूप थी कि कैलिफोर्निया से एक खबर आई. चीनी नए साल के जश्न में एक ओपन शूटिंग छिड़ गई जिसमें दस लोग मारे गए, 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सोलह लोगों को गोली लगी है. अमेरिकी मीडिया ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि मॉन्टेरी पार्क में चीनी नव वर्ष समारोह का आयोजन किया जा रहा था. शनिवार की रात करीब 10 बजे यहां ताबड़तोड़ फायरिंग की गई. इस दौरान यहां पर भारी संख्या में लोग मौजूद थे. पूरा मामला क्या हुआ और कैसे ये जश्न फायरिंग में बदल गया और क्यों इस समस्या का कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.